बोर्ड द्वारा, ब्रिटिश राजनेता के AI प्रतिरूपण की जाँच किया जाना
21 मई 2026
आज, बोर्ड विचार करने के लिए एक नए केस की घोषणा कर रहा है। इसके तहत, हम लोगों और संगठनों को, नीचे दिए गए बटन का उपयोग करके पब्लिक कमेंट सबमिट करने के लिए आमंत्रित करते हैं।
केस चयन
चूँकि हम हर अपील की सुनवाई नहीं कर सकते हैं, इसलिए बोर्ड उन केस को प्राथमिकता देता है, जो दुनिया भर के बहुत से यूज़र को प्रभावित करने की संभावना रखते हैं, जो सार्वजनिक चर्चा के लिए विशिष्ट महत्व रखते हैं या जो Meta की नीतियों के बारे में महत्वपूर्ण प्रश्न उठाते हैं।
आज हम जिस केस की घोषणा कर रहे हैं, वह है:
AI वीडियो द्वारा UK के राजनेता के, आप्रवासन संबंधी विचारों को गलत तरीके से पेश करना
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यूज़र की अपील
नीचे दिए गए बटन का उपयोग करके, पब्लिक कमेंट सबमिट करें
ओवरसाइट बोर्ड ने एक ऐसे केस का चयन किया है, जिसमें एक ब्रिटिश महिला राजनेता का कथित तौर पर AI से बनाया गया एक वीडियो शामिल है, जो आप्रवासन पर उनके विचारों को गलत तरीके से पेश करता है। बोर्ड, कंपनी की पॉलिसी और मानवाधिकार संबंधी ज़िम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए, इस पोस्ट के संबंध में Meta की कार्रवाइयों का मूल्यांकन करेगा, ताकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान सुनिश्चित किया जा सके और साथ ही महत्वपूर्ण सार्वजनिक मामलों से जुड़े भ्रामक कंटेंट के संभावित हानिकारक प्रभावों से भी निपटा जा सके।
नवंबर 2025 में, एक Facebook यूज़र ने एक एल्बम पोस्ट किया, जिसमें एक छोटा वीडियो शामिल था। इस वीडियो में UK लेबर पार्टी की एक पार्षद का प्रतिरूपण दिखाया गया था, जो स्कॉटलैंड के एक इलाके का प्रतिनिधित्व करती हैं। इस वीडियो में, जो AI-जनित प्रतीत होता है, राजनेता को यह कहते हुए दिखाया गया है: “शरणार्थियों का यहां स्वागत है, भले ही वे हमारी महिलाओं के साथ बलात्कार करें, क्योंकि गोरे लोग भी ऐसा ही करते हैं।” इस एल्बम के दूसरे वीडियो में लोगों को विरोध प्रदर्शन करते हुए दिखाया गया है; इसमें एक व्यक्ति फ़िलिस्तीनी झंडा लहरा रहा है और ऐसा लगता है कि AI-जनित ऑडियो के ज़रिए वह एंटीफ़ा, एक वामपंथी, फ़ासीवाद-विरोधी आंदोलन, की तारीफ़ में नारे लगा रहा है। एक आख़िरी तस्वीर में, जो AI-जनित के बजाय असली लगती है, कई महिलाएं दिखाई देती हैं, जिनमें पहले वीडियो में दिखाई गई राजनेता भी शामिल हैं, जो दक्षिणपंथी विचारधारा के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन के संकेत वाले पोस्टर पकड़े हुए हैं, और उन महिलाओं के नाम भी बताए गए हैं। एल्बम के कैप्शन में बिना कोई सबूत दिए, राजनेता पर टैक्स चोरी का आरोप लगाया गया है। यूज़र ने AI के इस्तेमाल का ख़ुलासा नहीं किया, और Meta ने कंटेंट पर, AI की जानकारी देने वाला कोई लेबल नहीं लगाया। इस कंटेंट को 50 से कम प्रतिक्रियाएं और कमेंट मिले, और 50 से कम शेयर मिले।
दो यूज़र ने डराना-धमकाना और उत्पीड़न संबंधी पॉलिसी का उल्लंघन करने के कारण, इस कंटेंट की शिकायत की, लेकिन Meta के सिस्टम ने इस पोस्ट को मानवीय रिव्यू के लिए प्राथमिकता नहीं दी, इसलिए यह कंटेंट Facebook पर बना रहा। दोनों यूज़र ने Meta से अपील की, लेकिन एक बार फिर से पोस्ट को मानवीय रिव्यू के लिए प्राथमिकता नहीं दी गई। उसके बाद, उनमें से एक यूज़र ने बोर्ड से अपील की।
बोर्ड को दिए अपने बयान में, शिकायत करने वाले यूज़र ने आरोप लगाया कि यह वीडियो AI-जनित है और इसमें एक राजनेता के विचारों को गलत तरीके से पेश किया गया है; यह संदर्भ एक ऐसे प्रदर्शन का है, जिसमें उस राजनेता ने शरण चाहने वालों को आवास दिए जाने का समर्थन किया था। यूज़र ने कहा कि यह कंटेंट, महिला की सुरक्षा के लिए ख़तरा बन सकता है।
2025 और 2026 में पूरे यूनाइटेड किंगडम में आप्रवासन-विरोधी विरोध प्रदर्शन हुए हैं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि पूरे UK में, शरण चाहने वालों को होटलों में ठहराने से महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएं उत्पन्न हो गई हैं। वीडियो में दिखाई गई राजनेता सहित जवाबी प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक तौर से इन दावों को नस्लवादी दुष्प्रचार बताते हुए खारिज कर दिया है, जो महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा के बारे में चिंताओं का इस्तेमाल करके अप्रवासी विरोधी नफ़रत को भड़काने का काम करता है। उन्होंने अपनी आवाज़ उठाने पर, उन्हें डराने-धमकाने और धमकियां मिलने की भी शिकायत की, जिसमें ऑनलाइन उत्पीड़न और AI-जनित कंटेंट का इस्तेमाल करके बदनामी करना शामिल है। आप्रवासन और शरण चाहने वालों के लिए आवास, ये ऐसे विषय रहे हैं, जिन पर ज़ोरदार राजनीतिक बहस हुई है, ख़ासकर चुनावों से पहले के समय में, जिनमें 7 मई, 2026 को स्कॉटलैंड में होने वाले चुनाव भी शामिल हैं। हालाँकि, वीडियो में दिखाई गई पार्षद 2026 में दोबारा चुनाव नहीं लड़ रही थीं।
जब बोर्ड ने इस केस का चयन किया, तो Meta के विषय विशेषज्ञों ने यह निष्कर्ष निकाला कि यह पोस्ट, कंपनी के कम्युनिटी स्टैंडर्ड का उल्लंघन नहीं करती है और इसलिए इसे हटाने या AI लेबल लगाने की कोई ज़रूरत नहीं है।
Meta के अनुसार, इस कंटेंट ने उसकी डराना-धमकाना और उत्पीड़न संबंधी पॉलिसी का उल्लंघन नहीं किया, क्योंकि संबंधित राजनेता एक वयस्क सार्वजनिक हस्ती हैं और इसलिए वे “छेड़छाड़ वाली अवांछित तस्वीरों” से मिलने वाली सुरक्षा के दायरे में नहीं आतीं; जबकि आम नागरिक इस तरह के कंटेंट को हटवाने के लिए खुद उसकी शिकायत कर सकते हैं। Meta ने यह भी निर्धारित किया कि वीडियो में किया गया यह दावा कि शरणार्थी बलात्कार करते हैं, उसकी नफ़रत फैलाने वाले आचरण संबंधी पॉलिसी का उल्लंघन नहीं करता, क्योंकि यह सभी या ज़्यादातर शरणार्थियों को अपराधियों के बराबर मानने वाला कोई सामान्यीकरण न होकर, कुछ शरणार्थियों के कार्यों के विरुद्ध किया गया एक दावा था। कंपनी ने बताया कि इस पोस्ट को गलत जानकारी के तौर पर नहीं हटाया गया, क्योंकि किसी भी विश्वसनीय भागीदार ने इसे गलत नहीं बताया और न ही यह कहा कि इससे “सीधे तौर पर तुरंत नुकसान होने का ख़तरा है,” और यह चुनाव में दख़लंदाज़ी भी नहीं थी। Meta का 'विश्वसनीय भागीदार' प्रोग्राम, स्वतंत्र संगठनों, एजेंसियों और शोधकर्ताओं का एक वैश्विक नेटवर्क है, जो कंटेंट से उभरते जोख़िम पर ध्यान दिलाता है। इस कंटेंट को तृतीय पक्ष के तथ्य-जांचकर्ताओं द्वारा रिव्यू नहीं किया गया था।
Meta ने यह भी निर्धारित किया कि उसकी गलत जानकारी संबंधी पॉलिसी के तहत, इस कंटेंट पर AI लेबल लगाने की ज़रूरत नहीं थी, जो यूज़र को बताता है कि यह कंटेंट डिजिटल तौर पर बनाया गया है या इसमें हेरफेर की गई है। Meta के अनुसार, उसके 'छेड़छाड़ किया गया मीडिया' नियम के तहत इस पर लेबल लगाने की ज़रूरत नहीं थी, क्योंकि यह कंटेंट किसी चुनाव या संकट के दौरान पोस्ट नहीं किया गया था; यह व्यंग्यात्मक है और इसे बहुत कम एंगेजमेंट मिला। इसलिए, इस बात की संभावना कम है कि यह "सार्वजनिक महत्व के किसी मामले पर जनता को गुमराह करने का कोई बहुत ज़्यादा जोख़िम उत्पन्न करेगा।"
बोर्ड ने इस केस का चयन इसलिए किया, ताकि उन स्थितियों में Meta की मानवाधिकार संबंधी ज़िम्मेदारियों का मूल्यांकन किया जा सके, जब AI टूल का इस्तेमाल, राजनेताओं का प्रतिरूपण करके, सार्वजनिक चर्चा के लिए महत्वपूर्ण मामलों पर उनके विचारों को गलत तरीके से पेश करने के लिए किया जाता है। यह केस, बोर्ड को इस बात की जांच करने की अनुमति देता है कि प्लेटफ़ॉर्म किस प्रकार ऐसे डिज़ाइन, पॉलिसी और एन्फ़ोर्समेंट संबंधी निर्णय ले सकते हैं, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करते हों, जिनमें राजनेताओं पर व्यंग्य या उनकी आलोचना करना भी शामिल है, और साथ ही, उन नुकसानों का भी समाधान करते हों, जो ज़रूरी मामलों पर जनता को गुमराह करने से उत्पन्न हो सकते हैं।
यह केस, बोर्ड की 'ऑटोमेशन और AI' और 'हाशिए पर पड़े समूहों के खिलाफ़ नफ़रत फैलाने वाली भाषा' संबंधी कार्यनीतिक प्राथमिकताओं के तहत आता है।
बोर्ड उन पब्लिक कमेंट की सराहना करेगा, जो इनसे संबंधित हों:
- यूरोप और वैश्विक स्तर पर आप्रवासन को लेकर जनमत को आकार देने में, AI-जनित कंटेंट का प्रसार, प्रभाव और स्रोत।
- सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म को, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए, AI-जनित उत्पीड़न, नफ़रत या धोखे से, जिसमें राजनेताओं के ख़िलाफ़ भी ऐसा होना शामिल है, कैसे निपटना चाहिए, ख़ास तौर से राजनीतिक आलोचना, व्यंग्य और हास्य से, जिसमें इस तरह के कंटेंट का प्रसार कम करने के लिए, उसे हटाने या वैकल्पिक उपायों की ज़रूरत और आनुपातिकता शामिल है।
- प्लेटफ़ॉर्म की पॉलिसी और डिज़ाइन के विकल्प, लोगों को AI-जनित कंटेंट को शेयर करने के लिए क्या प्रोत्साहित कर सकते हैं और किस तरह, जिनमें मुद्रीकरण और सुझावों से मिलने वाला प्रोत्साहन भी शामिल है, और इनसे मानवाधिकारों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को कैसे कम किया या रोका जा सकता है।
- विवादित मुद्दों पर अपनी आवाज़ उठाने वाले लोगों के ख़िलाफ़, जिनमें राजनेता भी शामिल हैं, उत्पीड़न अभियानों में डीपफ़ेक तकनीकों का इस्तेमाल कैसे किया जाता है; और लोगों को बदनाम करने के उद्देश्य से AI-जनित भ्रामक हमलों का, जानकारी के ऐक्सेस और राजनीतिक भागीदारी पर क्या व्यापक प्रभाव पड़ता है।
अपने फ़ैसलों में बोर्ड, Meta को पॉलिसी संबंधी सुझाव जारी कर सकता है। हालांकि ये सुझाव गैर-बाध्यकारी हैं, फिर भी Meta को 60 दिनों के भीतर उन पर प्रतिक्रिया देनी चाहिए। इस प्रकार, बोर्ड इस केस के लिए प्रासंगिक सुझावों का प्रस्ताव करने वाली पब्लिक कमेंट का स्वागत करता है।
पब्लिक कमेंट
अगर आपको या आपके संगठन को लगता है कि आप अहम दृष्टिकोण वाला योगदान दे सकते हैं, जो हमारे आज घोषित केस पर फ़ैसले तक पहुंचने में मदद कर सकता है, तो आप नीचे के बटन का उपयोग करके, अपना योगदान सबमिट कर सकते/सकती हैं। कृपया ध्यान दें कि पब्लिक कमेंट, बिना नाम बताए सबमिट की जा सकती हैं। पब्लिक कमेंट विंडो 14 दिनों के लिए खुली है, और गुरुवार, 4 जून को 23:59 पैसिफ़िक स्टैंडर्ड टाइम (PST) पर बंद हो जाएगी।
आगे क्या होगा
अगले कुछ हफ़्तों में, बोर्ड मेंबर इन केस पर विचार-विमर्श करेंगे। जब वे अपने फ़ैसले पर पहुंच जाएंगे, तो हम इसे फ़ैसले पेज पर पोस्ट करेंगे।