बोर्ड द्वारा, खाते संबंधी पहले केस में प्रतिबंध को कायम रखा जाना, लेकिन प्रणालीगत मानवाधिकार चिंताओं पर ध्यान आकर्षित किया जाना
4 जून 2026
ओवरसाइट बोर्ड की, इस बात को लेकर उचित प्रोसेस संबंधी चिंताएं हैं कि Meta, यूज़र खातों को कैसे निष्क्रिय करती है और व्यापक रूप से, कंपनी का खाता संचालन संबंधी दृष्टिकोण कैसा है। इस केस में, बोर्ड ने पाया कि कंपनी द्वारा एक खाते को स्थायी रूप से निष्क्रिय करना सही था, क्योंकि उस खाते से एक पत्रकार के खिलाफ़ हिंसा की गंभीर धमकियां पोस्ट की गई थीं। हालांकि, बोर्ड ने ऐसी धमकियों के प्रति Meta की प्रतिक्रिया की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं, जिनका समाधान, कंपनी को मानवाधिकारों के सम्मान को सुनिश्चित करने के लिए करना होगा।
बोर्ड ने Meta और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के लिए, खाता संचालन संबंधी दृष्टिकोण का मार्गदर्शन करने वाले प्रमुख सिद्धांतों को रेखांकित किया है, जिनमें खाता एन्फ़ोर्समेंट नियमों में यूज़र के पारदर्शिता संबंधी अधिकारों का सम्मान करना और निष्पक्ष अपील प्रोसेस उपलब्ध कराना शामिल है।
Meta द्वारा संदर्भित यह केस, बोर्ड का पहला ऐसा केस है, जिसमें किसी यूज़र के खाते को स्थायी रूप से निष्क्रिय किए जाने का मूल्यांकन किया गया, जो व्यक्तिगत कंटेंट संबंधी व्यक्तिगत फ़ैसलों से आगे बढ़कर, उसके अधिकार-क्षेत्र के विस्तार का एक परीक्षण भी है।
यह महत्वपूर्ण क्यों है
बोर्ड, यूज़र की एक तत्काल ध्यान देने योग्य चिंता—खातों को निष्क्रिय किया जाना—पर विचार कर रहा है। इस केस पर, उसे 750 से अधिक पब्लिक कमेंट प्राप्त हुईं, जो सबमिट करने की शर्तों को पूरा करती थीं। वे उन असंख्य शिकायतों के अतिरिक्त हैं, जो बोर्ड को 2020 में केस की सुनवाई शुरू करने के बाद से उन यूज़र से प्राप्त हुई हैं, जिन्होंने अपने खातों का ऐक्सेस खो दिया था।
बोर्ड इस बात के महत्व को रेखांकित करता है कि जिन लोगों के खाते निष्क्रिय किए जाते हैं और जिन लोगों को अपमानजनक कंटेंट का निशाना बनाया जाता है, उनके लिए उचित प्रोसेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। यह केस, सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के खिलाफ़ अनुपातहीन रूप से अधिक ऑनलाइन दुर्व्यवहार और शारीरिक हिंसा से उसके संबंध को भी दर्शाता है। इस तरह के ऑनलाइन हमले सभी प्रकार के सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर होते हैं।
इस केस के बारे में
2025 में, Meta ने 70,000 से अधिक फ़ॉलोअर वाले एक Instagram खाते को कंपनी के कम्युनिटी स्टैंडर्ड का उल्लंघन करने के कारण स्थायी रूप से निष्क्रिय कर दिया।
अपने संदर्भ में, Meta ने उस खाते की पांच पोस्ट शामिल की। इनमें से दो पोस्ट में एक महिला पत्रकार के खिलाफ़ हिंसा की दृश्य रूप में धमकियां थीं, जिनमें उसके चेहरे पर निशाना लगाने का चिह्न दिखाया गया था। तीसरी पोस्ट में, उसी पत्रकार के लिए अपमानजनक शब्द “वेश्या” का प्रयोग किया गया था और बिना किसी प्रमाण के उस पर एक सार्वजनिक हस्ती के साथ यौन गतिविधि में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। पत्रकार ने इस बारे में Meta के उन कर्मचारियों से शिकायत की, जिन्हें वह जानती थी, जिसके परिणामस्वरूप केस का उच्च-स्तरीय रिव्यू किया गया। Meta ने शुरुआत में “वेश्या” वाला आरोप लगाने वाली पोस्ट हटा दी। दूसरे रिव्यू में, कंपनी ने हिंसा की धमकी देने वाली पोस्ट की पहचान की और पत्रकार की सुरक्षा के जोख़िम को देखते हुए खाते की पवित्रता और हिंसा और उकसाने संबंधी पॉलिसी के अंतर्गत खाते को स्थायी रूप से निष्क्रिय कर दिया।
Meta ने, दो अन्य पोस्ट को भी संदर्भित किया, जिन्हें उसने खाते के व्यापक व्यवहार का उदाहरण बताया। इनमें से एक पोस्ट में प्रमुख राजनेताओं के खिलाफ़ समलैंगिक-विरोधी अपशब्द “फ़ैग” का उपयोग किया गया था। दूसरी पोस्ट में यातायात के सार्वजनिक साधन में बैठे एक युगल की फ़ोटो दिखाई गई थी, जो ओरल सेक्स में संलग्न लग रहे थे और आरोप लगाया गया था कि वे एक धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय से हैं और उनके निष्कासन की मांग की गई थी। Meta ने हर पोस्ट को, प्रकाशित होने के कुछ समय बाद हटा दिया। कंपनी ने इन उल्लंघनों के साथ-साथ, खाते को स्थायी रूप से बंद किए जाने से पहले के 12 महीनों में उसे मिली कई अन्य स्ट्राइक का हवाला दिया, जो उसकी पॉलिसी के तहत खाते को हटाने को अतिरिक्त रूप से सही ठहराते हैं।
मुख्य निष्कर्ष
बोर्ड ने निष्कर्ष निकाला कि दो पोस्ट में दी गई गंभीर हिंसात्मक धमकियों के कारण खाते को स्थायी रूप से निष्क्रिय करने तथा पॉलिसी का उल्लंघन करने वाली तीन अन्य पोस्ट को हटाने के मामले में Meta सही थी। ये कार्रवाइयां, Meta की मानवाधिकार संबंधी जिम्मेदारियों के अनुरूप थीं। कंपनी को, अपने प्लेटफ़ॉर्म पर हिंसा की धमकियों के खिलाफ़ एक मज़बूत और सख्त रुख अपनाना चाहिए।
फिर भी, यह केस, खाता संचालन और खाते को स्थायी रूप से निष्क्रिय करने संबंधी Meta के नियमों की स्पष्टता के संदर्भ में उचित प्रोसेस और अनुपातिकता से जुड़ी चिंताएं उत्पन्न करता है। यह केस, पत्रकारों और मानवाधिकार रक्षकों सहित लोगों के खिलाफ़ हिंसा की गंभीर और यकीन करने लायक धमकियों के प्रति Meta की प्रतिक्रिया की प्रभावशीलता पर भी गंभीर प्रश्न उठाता है, जिनका कि कंपनी को समाधान करना चाहिए। सुरक्षा में सुधार, लोगों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को भी सुदृढ़ कर सकता है।
ऐसा लगता है कि इस खाते ने षड्यंत्रकारी पोस्ट का प्रसार करके और जानी-मानी हस्तियों का उत्पीड़न करके इतनी बड़ी संख्या में फ़ॉलोअर हासिल किए थे। कुछ बोर्ड मेंबर के लिए यह प्रश्न भी महत्वपूर्ण है कि Meta के प्लेटफ़ॉर्म की डिज़ाइन, उकसाने वाले व्यवहार को किस तरह से प्रोत्साहित करती है और हिंसा की धमकियों के व्यापक प्रसार के जोख़िम को बढ़ाती है। Meta को यह रिव्यू करना चाहिए कि कैसे उसके डिज़ाइन विकल्प उसी व्यवहार को बढ़ावा देते हैं, जिस पर उसकी पॉलिसी प्रतिबंध लगाती हैं।
इस खाते को निष्क्रिय करने के फ़ैसले को कायम रखने का मतलब यह नहीं है कि बोर्ड, खातों पर प्रतिबंध लगाने और उन्हें सीमित करने के कंपनी के दृष्टिकोण का पूरी तरह से समर्थन करता है।
यह केस, प्रणालीगत स्तर पर मानवाधिकार संबंधी निम्नलिखित चिंताओं को उजागर करता है:
- हिंसा की धमकियों का निशाना बनाए गए लोगों के लिए उचित प्रोसेस – बोर्ड गंभीर रूप से चिंतित है कि Meta ने, स्पष्ट और यकीन करने लायक दोनों धमकियों को समय पर रिव्यू नहीं किया, जिससे इन्हें हटाने में देरी हुई और निशाना बनाई गई पत्रकार ने लंबे समय तक असहनीय जोख़िम का सामना किया।
- उन यूज़र के लिए उचित प्रोसेस, जिनके खाते निष्क्रिय किए जाते हैं – न्याय प्रदान करने में हुई देरी ने खाताधारक के लिए उस उचित प्रोसेस को कमज़ोर कर दिया, जो उसे अपने व्यवहार को सुधारने के अधिक अवसर प्रदान कर सकती थी।
- खाता निलंबन और निष्क्रियता संबंधी अस्पष्ट पॉलिसी – यूज़र को, Meta के दृष्टिकोण के बारे में सुलभ, सुसंगत और व्यापक जानकारी प्रदान करना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। Meta द्वारा AI असिस्टेंट की भूमिका का विस्तार इसमें मदद कर सकता है। पॉलिसी और असिस्टेंट की प्रतिक्रियाओं के बीच तालमेल महत्वपूर्ण है। Meta द्वारा, Instagram खातों को निष्क्रिय किए से पहले लगाए जाने वाले प्रतिबंध सार्वजनिक नहीं हैं।
- “गंभीर” सुरक्षा चिंताओं के आधार पर खाते को स्थायी रूप से निष्क्रिय करने के फ़ैसलों के मार्गदर्शन के लिए स्पष्ट ढांचे का अभाव – वर्तमान व्यवस्था की तुलना में अधिक विस्तृत, किंतु पर्याप्त लचीलेपन वाला ढांचा रिव्यूअर के लिए ज़रूरी है। इससे संगतता बढ़ सकती है और यकीन करने लायक धमकियों के नज़रअंदाज़ होने से बचा जा सकता है।
- गंभीर पॉलिसी-उल्लंघनों के मामलों में स्थायी निष्क्रियता और केवल स्ट्राइक प्रणाली पर निर्भर रहने के बीच कोई मध्यवर्ती विकल्प नहीं – जहां परिस्थितियां नरमी बरतने योग्य हों, वहां पर्याप्त अवधि का, लेकिन समय-आधारित निलंबन अधिक सापेक्ष हो सकता है।
बोर्ड ने Meta और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म को खाता-निष्क्रियता संबंधी अपने दृष्टिकोण में मार्गदर्शन देने के लिए निम्नलिखित सिद्धांत प्रस्तुत किए:
- यूज़र के, सोशल मीडिया खातों को स्थायी रूप से निष्क्रिय करने से संबंधित नियमों पर स्पष्ट और व्यापक मार्गदर्शन प्राप्त करने के अधिकार का सम्मान किया जाए।
- यूज़र के, खाता निष्क्रिय करने के विस्तृत कारण जानने के अधिकार का सम्मान किया जाए, जिनमें यह प्रदान करना शामिल हो: आसानी से ऐक्सेस करने लायक, विश्वसनीय जानकारी और अपील के विकल्प; किसी खाते को रिव्यू या उसे निष्क्रिय करने में किसी सरकारी अनुरोध की भूमिका के बारे में, और रिव्यू प्रोसेस में ऑटोमेशन की भूमिका के बारे में जानकारी।
- सोशल मीडिया कंपनियों को, उन खातों के बारे में जानकारी शेयर करने का प्रोग्राम बनाने के लिए समन्वय करना चाहिए, जो गंभीर हिंसा की यकीन करने लायक धमकियां देते हैं।
- प्रभावी और निष्पक्ष अपील प्रोसेस उपलब्ध कराई जाए, जिसमें यूज़र को अपनी अपील के लिखित कारण प्रदान करने का अवसर मिले और जटिल केस में मानवीय रिव्यू को प्राथमिकता दी जाए।
- खाता निष्क्रिय करने के एन्फ़ोर्समेंट संबंधी रुझानों पर, सार्थक जानकारी वाली विस्तृत पारदर्शिता रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाएं।
अधिक जानकारी
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