पलट जाना

कोलंबिया का विरोध प्रदर्शन

ओवरसाइट बोर्ड ने कोलंबिया के राष्ट्रपति इवान ड्यूक की आलोचना कर रहे प्रदर्शनकारियों का वीडियो दिखाने वाली पोस्ट को हटाने के Facebook के फ़ैसले को बदल दिया है.

निर्णय का प्रकार

मानक

नीतियां और विषय

विषय
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विरोध, सामुदायिक संगठन
सामुदायिक मानक
नफ़रत फ़ैलाने वाली भाषा

क्षेत्र/देश

जगह
कोलंबिया

प्लैटफ़ॉर्म

प्लैटफ़ॉर्म
Facebook

संलग्नक

Public Comments 2021-010-FB-UA

केस का सारांश

ओवरसाइट बोर्ड ने कोलंबिया के राष्ट्रपति इवान ड्यूक की आलोचना कर रहे प्रदर्शनकारियों का वीडियो दिखाने वाली पोस्ट को हटाने के Facebook के फ़ैसले को बदल दिया है. उस वीडियो में प्रदर्शनकारी एक ऐसे शब्द का उपयोग करते हैं, जिसे Facebook के नफ़रत फैलाने वाली भाषा से जुड़े स्टैंडर्ड के तहत अपशब्द माना जाता है. इस कंटेंट के जनहित से जुड़े महत्व का मूल्यांकन करके बोर्ड ने यह पाया Facebook को इस केस में कंटेंट को ख़बरों में रहने लायक अनुमति देनी चाहिए थी.

केस की जानकारी

मई 2021 में कोलंबिया के एक क्षेत्रीय समाचार आउटलेट के Facebook पेज ने कोई अतिरिक्त कैप्शन जोड़े बिना किसी दूसरे Facebook पेज की पोस्ट शेयर की. यह शेयर की गई पोस्ट ही इस केस में समस्या का कारण थी. मूल पोस्ट में कोलंबिया में हुए विरोध प्रदर्शन को दिखाने वाला एक छोटा वीडियो है, जिसमें लोग “SOS COLOMBIA” (कोलंबिया को बचाओ) लिखा हुआ बैनर लेकर जुलूस निकाल रहे हैं.

प्रदर्शनकारी स्पैनिश भाषा में कुछ गा रहे हैं और उसमें कोलंबिया के राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए कोलंबिया की सरकार द्वारा हाल ही में प्रस्तावित कर सुधार का उल्लेख कर रहे हैं. प्रदर्शनकारी अपने नारों में राष्ट्रपति को एक बार “hijo de puta” बुलाते हैं और एक बार “deja de hacerte el marica en la tv” कहते हैं. Facebook ने इन वाक्यांशों का कुछ इस तरह अनुवाद किया, “son of a bitch (कुत्ते के पिल्ले )” और “stop being the fag on tv” (टीवी पर समलैंगिक बनना बंद करो). इस वीडियो में स्पैनिश भाषा में प्रदर्शनकारियों की प्रशंसा करने वाला टेक्स्ट लिखा हुआ है. इस शेयर की गई पोस्ट को लगभग 19000 बार देखा गया और पाँच से भी कम यूज़र्स ने Facebook को इसकी रिपोर्ट की.

मुख्य निष्कर्ष

Facebook ने इस कंटेंट को इसलिए हटा दिया क्योंकि इसमें “marica” (जिसे आगे से “m**ica” लिखा गया है) शब्द शामिल था. इससे Facebook की नफ़रत फैलाने वाली भाषा से जुड़े कम्युनिटी स्टैंडर्ड का उल्लंघन हुआ था, जो यौन रुचि जैसी सुरक्षित विशिष्टताओं के आधार पर “अपशब्दों के ज़रिए लोगों का वर्णन करने वाले और उन्हें नकारात्मक रूप से निशाना बनाने वाले” कंटेंट को अनुमति नहीं देता है. Facebook ने ध्यान दिया कि वैसे तो ऐसे कंटेंट को सैद्धांतिक तौर पर ख़बरों में रहने लायक अनुमति मिल सकती है, लेकिन अनुमति केवल तभी मिल सकती है, जब शुरुआत में कंटेंट का रिव्यू करने वाले मॉडरेटर्स उसका फिर से रिव्यू करने के लिए उसे Facebook की कंटेंट पॉलिसी टीम के पास भेजने का फ़ैसला लें. इस केस में ऐसा नहीं हुआ. बोर्ड यह भी ध्यान दिया कि Facebook ने किसी केस को रिव्यू के लिए अगले स्तर पर भेजने के मापदंड सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध नहीं कराए हैं.

“m**rica” शब्द Facebook के द्वारा इस आधार पर अपशब्द माना गया है कि यह अपने आप में ही आपत्तिजनक है और इसका उपयोग मुख्य रूप से समलैंगिक पुरुषों के विरुद्ध अपमानजनक और भेदभावपूर्ण शब्द के तौर पर किया जाता है. हालाँकि बोर्ड इस बात से सहमत है कि Facebook के नफ़रत फैलाने वाली भाषा से जुड़े कम्युनिटी स्टैंडर्ड में दिए गए अपवादों में से कोई भी अपवाद इस अपशब्द के उपयोग की अनुमति नहीं देता, जिसके कारण LGBT लोगों में डर या बहिष्कृत होने की भावना आ सकती है, बोर्ड को लगता है कि कंपनी को इस केस में कंटेंट को ख़बरों में रहने लायक अनुमति देनी चाहिए थी.

ख़बरों में रहने लायक अनुमति देने के लिए Facebook को उल्लंघन करने वाले कंटेंट से होने वाले नुकसान के जोखिम के विरुद्ध कुछ अभिव्यक्तियों को अनुमति देने के जनहित का मूल्यांकन करना होता है. इस काम को करने के लिए Facebook विचार करता है कि कही गई बात किस तरह की थी और देश विशेष के संदर्भ को भी ध्यान में रखता है जैसे कि उस देश की राजनैतिक संरचना क्या है और वहाँ प्रेस की स्वतंत्रता है या नहीं.

इस कंटेंट के जनहित के महत्व का मूल्यांकन करके बोर्ड ने पाया कि यह कंटेंट कोलंबिया के राजनैतिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण क्षण के दौरान कोलंबिया की सरकार के विरुद्ध किए जा रहे व्यापक प्रदर्शनों के समय पोस्ट किया गया था. हालाँकि लगता है कि प्रदर्शनकारियों ने इस अपशब्द का उपयोग जानबूझकर किया है, लेकिन इसका उपयोग कई अन्य शब्दों के बीच एक बार किया गया है और जो नारे लगाए गए हैं, उनका उद्देश्य मुख्य रूप से देश के राष्ट्रपति की आलोचना करना है.

बोर्ड ने यह भी पाया कि जिस माहौल में राजनैतिक अभिव्यक्ति के ज़रिए सीमित हैं, वहाँ सोशल मीडिया ने पत्रकारों सहित सभी लोगों को एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म मुहैया करवाया है, जहाँ वे इन प्रदर्शनों से जुड़ी जानकारी शेयर कर सकते हैं. इस केस में ख़बरों में रहने लायक अनुमति देने का मतलब यह है कि केवल अपवाद वाले और कम नुकसानदेह कंटेंट को ही अनुमति दी जाएगी.

ओवरसाइट बोर्ड का फ़ैसला

ओवरसाइट बोर्ड ने Facebook के कंटेंट को हटाने के फ़ैसले को बदल दिया है और पोस्ट को रीस्टोर करने के लिए कहा है.

पॉलिसी से जुड़ी सलाह के कथन में बोर्ड ने सुझाव दिया है कि Facebook:

  • अपने नफ़रत फैलाने वाली भाषा से जुड़े कम्युनिटी स्टैंडर्ड का उल्लंघन करने वाले माने जाने वाले अपशब्दों की लिस्ट में से व्याख्यात्मक उदाहरण प्रकाशित करे, जिनमें सीमा-रेखा वाले वे केस भी शामिल हों, जो कुछ संदर्भों में नुकसानदेह हो सकते हैं पर कुछ संदर्भों में नहीं.
  • कम्युनिटी स्टैंडर्ड की भूमिका में दी गई ख़बरों में रहने लायक अनुमति देने की संक्षिप्त व्याख्या को Facebook के ट्रांसपेरेंसी सेंटर में दिए गए विस्तृत स्पष्टीकरण से लिंक करे कि यह पॉलिसी कैसे लागू होती है. कंपनी को इस स्पष्टीकरण के साथ बड़े स्तर के विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग सहित कई विभिन्न संदर्भों के व्याख्यात्मक उदाहरण भी देने चाहिए.
  • संभावित रूप से कम्युनिटी स्टैंडर्ड का उल्लंघन करने वाले लेकिन ख़बरों में रहने लायक अनुमति पाने के लिए योग्य जनहित के कंटेंट को अतिरिक्त रिव्यू के लिए भेजने हेतु कंटेंट रिव्यूअर्स के लिए स्पष्ट शर्तें तैयार करनी चाहिए और उनका प्रचार करना चाहिए. इन शर्तों में राजनैतिक समस्याओं से जुड़े बड़े विरोध प्रदर्शनों को दिखाने वाले कंटेंट के बारे में भी स्पष्टता होनी चाहिए.
  • जो मूल्यांकन के बाद उल्लंघन करने वाला पाया गया हो लेकिन जनहित के कारणों से उसे प्लेटफ़ॉर्म पर रहने दिया गया हो, ऐसे कंटेंट की रिपोर्ट करने वाले सभी यूज़र्स को सूचना दे कि पोस्ट को ख़बरों में रहने लायक अनुमति दी गई थी.

*केस के सारांश से केस का ओवरव्यू पता चलता है और आगे के किसी फ़ैसले के लिए इसको आधार नहीं बनाया जा सकता है.

केस का पूरा फ़ैसला

1. फ़ैसले का सारांश

ओवरसाइट बोर्ड ने कोलंबिया के राष्ट्रपति इवान ड्यूक की आलोचना कर रहे कोलंबिया के प्रदर्शनकारियों का वीडियो दिखाने वाली Facebook पोस्ट को हटाने के Facebook के फ़ैसले को बदल दिया है. वीडियो में प्रदर्शनकारियों ने एक ऐसे शब्द का उपयोग किया, जिसे Facebook अपशब्द मानता है और इससे Facebook के नफ़रत फैलाने वाली भाषा से जुड़े कम्युनिटी स्टैंडर्ड का उल्लंघन होता है क्योंकि यह शब्द लोगों पर उनकी यौन रुचि के आधार पर सीधा हमला करता है. बोर्ड ने पाया कि हालाँकि कंटेंट को हटाने का Facebook का फ़ैसला ऊपरी तौर पर तो उसके नफ़रत फैलाने वाली भाषा से जुड़े कम्युनिटी स्टैंडर्ड के अनुरूप था (इसका मतलब है कि ऊपरी तौर पर देखने पर लग रहा था कि उस कंटेंट ने स्टैंडर्ड का उल्लंघन किया है), लेकिन इस मामले में कंटेंट को प्लेटफ़ॉर्म पर बनाए रखने के लिए ख़बरों में रहने लायक अनुमति दी जानी चाहिए थी.

2. केस का विवरण

मई 2021 में कोलंबिया के एक क्षेत्रीय समाचार आउटलेट के Facebook पेज ने कोई अतिरिक्त कैप्शन जोड़े बिना किसी दूसरे Facebook पेज की पोस्ट शेयर की - इस केस में शेयर की गई इस पोस्ट में समस्या है. मूल पोस्ट में कोलंबिया में हुए विरोध प्रदर्शन को दिखाने वाला एक छोटा वीडियो है (जिसे सबसे पहले TikTok पर शेयर किया गया था), जिसमें लोग “SOS COLOMBIA” (कोलंबिया को बचाओ) लिखा हुआ बैनर लेकर जुलूस निकाल रहे हैं. प्रदर्शनकारी स्पैनिश भाषा में कुछ गा रहे हैं और उसमें कोलंबिया के राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए कोलंबिया की सरकार द्वारा हाल ही में प्रस्तावित कर सुधार का उल्लेख कर रहे हैं. प्रदर्शनकारी अपने नारों में राष्ट्रपति को एक बार “hijo de puta” बुलाते हैं और एक बार “deja de hacerte el marica en la tv” कहते हैं. Facebook ने इन वाक्यांशों का कुछ इस तरह अनुवाद किया, “son of a bitch (कुत्ते के पिल्ले)” और “stop being the fag on tv” (टीवी पर समलैंगिक बनना बंद करो). 22 सेकंड के इस वीडियो में स्पैनिश भाषा में प्रदर्शनकारियों की प्रशंसा करने वाला टेक्स्ट लिखा हुआ है.

इस शेयर की गई पोस्ट को लगभग 19,000 बार देखा गया और 70 से ज़्यादा बार शेयर किया गया. पाँच से कम यूज़र्स ने इस कंटेंट की रिपोर्ट की. ह्यूमन रिव्यू के बाद Facebook ने नफ़रत फैलाने वाली भाषा से जुड़ी अपनी पॉलिसी के अंतर्गत इस शेयर की गई पोस्ट को हटा दिया. अपने नफ़रत फैलाने वाली भाषा से जुड़े कम्युनिटी स्टैंडर्ड के तहत Facebook ऐसे कंटेंट को हटा देता है जिसमें यौन रुचि सहित अन्य सुरक्षित विशिष्टताओं के आधार पर “अपशब्दों के ज़रिए लोगों का वर्णन किया जाता है या उन्हें नकारात्मक तरीके से निशाना बनाया जाता है, जहाँ अपशब्दों का मतलब है ऐसे शब्द जो अपने आप में ही आपत्तिजनक हों और जिनका उपयोग यौन रुचि सहित अन्य सुरक्षित विशिष्टताओं के आधार पर अपमानजनक नामों की तरह किया जाता हो”. “marica” (जिसे आगे से “m**ica” लिखा गया है) शब्द प्रतिबंधित अपशब्दों की Facebook की लिस्ट में शामिल है. शेयर की गई पोस्ट को पोस्ट करने वाले यूज़र ने Facebook केे फ़ैसले के विरुद्ध अपील की. ह्यूमन रिव्यू के बाद Facebook ने उस कंटेंट को हटाने के अपने मूल फ़ैसले को बरकरार रखा. Facebook ने उसकी मूल पोस्ट को भी प्लेटफ़ॉर्म से हटा दिया.

3. प्राधिकार और दायरा

बोर्ड को उस यूज़र के अपील करने के बाद Facebook के फ़ैसले का रिव्यू करने का अधिकार है, जिसकी पोस्ट हटा दी गई थी (चार्टर अनुच्छेद 2, सेक्शन 1; उपनियम अनुच्छेद 2, सेक्शन 2.1). बोर्ड उस फ़ैसले को बरकरार रख सकता है या उसे बदल सकता है (चार्टर अनुच्छेद 3, सेक्शन 5).

बोर्ड के फ़ैसले बाध्यकारी होते हैं और उनमें पॉलिसी से जुड़ी सलाह के कथनों के साथ सुझाव भी शामिल हो सकते हैं. ये सुझाव बाध्यकारी नहीं होते हैं, लेकिन Facebook को उनका जवाब देना होगा (चार्टर अनुच्छेद 3, सेक्शन 4).

4. प्रासंगिक स्टैंडर्ड

ओवरसाइट बोर्ड ने इन स्टैंडर्ड पर विचार करते हुए अपना फ़ैसला दिया है:

I. Facebook के कम्युनिटी स्टैंडर्ड:

नफ़रत फैलाने वाली भाषा से जुड़े कम्युनिटी स्टैंडर्ड के लिए पॉलिसी बनाने के कारण में Facebook ने कहा है कि इस प्लेटफ़ॉर्म पर नफ़रत फैलाने वाली भाषा का उपयोग करने की अनुमति नहीं है, "क्योंकि इससे डराने-धमकाने और बहिष्कार का माहौल बनता है और कुछ मामलों में इससे सचमुच में हिंसा भड़क सकती है."

कम्युनिटी स्टैंडर्ड नफ़रत फैलाने वाली भाषा को विचारधाराओं या संस्थानों पर नहीं बल्कि लोगों पर इन सुरक्षित विशिष्टताओं के आधार पर सीधे हमले के रूप में परिभाषित करता है: जातीयता, नस्ल, राष्ट्रीयता, अक्षमता, धार्मिक मान्यता, जाति, यौन रुचि, लिंग, लैंगिक पहचान और गंभीर बीमारी. यह ऐसे कंटेंट पर रोक लगाता है, जो “अपशब्दों के ज़रिए लोगों का वर्णन करता है या उन्हें नकारात्मक रूप से निशाना बनाता है, जहाँ अपशब्दों का मतलब है ऐसे शब्द जो अपने आप में ही आपत्तिजनक हों और जिनका उपयोग ऊपर बताई गई विशिष्टताओं के आधार पर अपमानजनक नामों की तरह किया जाता हो.”

II. Facebook के मूल्य:

Facebook के मूल्यों को कम्युनिटी स्टैंडर्ड के परिचय सेक्शन में बताया गया है. “अभिव्यक्ति” के महत्व को “सर्वोपरि” बताया गया है:

हमारे कम्युनिटी स्टैंडर्ड का लक्ष्य हमेशा एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म बनाना रहा है, जहाँ लोग अपनी बात रख सकें और अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकें. […] हम चाहते हैं कि लोग अपने लिए महत्व रखने वाले मुद्दों पर खुलकर बातें कर सकें, भले ही कुछ लोग उन बातों पर असहमति जताएँ या उन्हें वे बातें आपत्तिजनक लगें.

Facebook चार मूल्यों का सम्मान करने के लिए "अभिव्यक्ति" को सीमित कर देता है, जिनमें से इस केस में प्रासंगिक मूल्य है “गरिमा”:

“गरिमा” : हमारा मानना है कि सभी लोगों को एक जैसा सम्मान और एक जैसे अधिकार मिलने चाहिए. हम उम्मीद करते हैं कि लोग एक-दूसरे की गरिमा का ध्यान रखेंगे और दूसरों को परेशान नहीं करेंगे या नीचा नहीं दिखाएँगे.

III. मानवाधिकार के स्टैंडर्ड:

बिज़नेस और मानवाधिकारों के बारे में संयुक्त राष्ट्र संघ के मार्गदर्शक सिद्धांत (UNGP), जिन्हें 2011 में संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवाधिकार समिति का समर्थन मिला है, वे प्राइवेट बिज़नेस की मानवाधिकारों से जुड़ी ज़िम्मेदारियों का स्वैच्छिक ढांचा तैयार करते हैं. इस केस में बोर्ड ने Facebook की मानवाधिकार से जुड़ी ज़िम्मेदारियों का विश्लेषण इन मानवाधिकार मानकों को ध्यान में रखते हुए किया:

  • विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार: अनुच्छेद 19, नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिज्ञापत्र ( ICCPR), सामान्य टिप्पणी सं. 34, मानव अधिकार समिति, 2011 विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बारे में संयुक्त राष्ट्र संघ के ख़ास रैपर्टर की रिपोर्ट: A/HRC/38/35 (2018) और A/74/486 (2019).
  • भेदभाव न किए जाने का अधिकार: अनुच्छेद 2, पैरा. 1 और अनुच्छेद 26, ICCPR; सामान्य कमेंट सं. 18, मानवाधिकार समिति 1989; लोगों को यौन रुचि और लैंगिक पहचान के आधार पर हिंसा और भेदभाव से सुरक्षित रखने के बारे में 2016 में संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवाधिकार समिति द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव 32/2; लोगों को यौन रुचि और लैंगिक पहचान के आधार पर हिंसा और भेदभाव से सुरक्षित रखने के बारे में संयुक्त राष्ट्र संघ के स्वतंत्र विशेषज्ञ की रिपोर्ट; A/HRC/35/36 (2017) और A/HRC/38/43 (2018).
  • शांतिपूर्ण तरीके से किसी जगह पर इकट्ठा होने का अधिकार: अनुच्छेद 21, ICCPR, सामान्य टिप्पणी संख्या 37, मानवाधिकार समिति, 2020; शांतिपूर्ण तरीके से कहीं पर इकट्ठा होने और संघ बनाने की स्वतंत्रता के अधिकार के बारे में संयुक्त राष्ट्र संघ के ख़ास रैपर्टर की रिपोर्ट A/HRC/41/41 (2019).

5. यूज़र का कथन

उस यूज़र ने, जो उस पेज का एडमिन है जिस पेज पर वह कंटेंट पोस्ट किया गया था, बोर्ड को स्पैनिश भाषा में अपनी अपील सबमिट की. अपील में यूज़र ने कहा कि वह एक पत्रकार हैं, जो अपने राज्य के स्थानीय समाचारों की रिपोर्टिंग करते हैं. यूज़र का दावा है कि वह कंटेंट किसी और ने पोस्ट किया था, जिसने उनका मोबाइल ले लिया था लेकिन इसके बावजूद भी इस कंटेंट का इरादा नुकसान पहुँचाना नहीं था और इसने संकट के समय में विरोध प्रदर्शनों को दिखाया. यूज़र का कहना है कि उनका लक्ष्य Facebook की पॉलिसी का पालन करना है और उनका दावा है कि उस कंटेंट को हटाए जाने के कारण उनके अकाउंट पर दंडात्मक कार्रवाई की गई.

यूज़र का आगे कहना है कि उस कंटेंट में युवाओं को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के फ़्रेमवर्क के अंतर्गत विरोध प्रदर्शन करते हुए दिखाया गया है और उसमें युवा अपनी बात बिना हिंसा फैलाए कर रहे हैं और आम बोलचाल की भाषा का उपयोग करके अपने अधिकार माँग रहे हैं. यूज़र सरकार द्वारा विरोध प्रदर्शन को दबाने पर भी चिंता व्यक्त करता है.

6. Facebook के फ़ैसले का स्पष्टीकरण

Facebook ने इस कंटेंट को इस आधार पर हटा दिया क्योंकि इसमें “m**ica” शब्द था और इसलिए इससे Facebook के नफ़रत फैलाने वाली भाषा से जुड़े कम्युनिटी स्टैंडर्ड का उल्लंघन हो रहा था, जो “अपशब्दों के ज़रिए लोगों का वर्णन करने या उन्हें नकारात्मक रूप से निशाना बनाने वाले कंटेंट पर प्रतिबंध लगाता है, जहाँ अपशब्दों का मतलब होता है ऐसे शब्द जो अपने आप में ही आपत्तिजनक हों और जिनका उपयोग ऊपर बताई गई विशिष्टताओं [अर्थात सुरक्षित विशिष्टताओं] के आधार पर अपमानजनक नामों की तरह किया जाता हो. “m**ica” शब्द Facebook की प्रतिबंधित अपशब्दों की लिस्ट में इसलिए शामिल है क्योंकि इसके द्वारा लोगों को उनकी यौन रुचि के आधार पर निशाना बनाया जाता है.

Facebook का कहना है कि राजनेताओं या सार्वजनिक हस्तियों के विरुद्ध अपशब्दों का उपयोग करने के कोई अपवाद नहीं हैं. इसके अलावा, Facebook मानता है कि “यह मायने नहीं रखता कि बोलने वाला या निशाना बनाया जा रहा व्यक्ति सुरक्षित विशिष्टता वाले ऐसे किसी समूह का सदस्य है या नहीं, जिस पर हमला किया जा रहा है. चूँकि अपनी सुरक्षित विशिष्टता द्वारा परिभाषित किसी समूह के लिए अपशब्द अपने आप में आपत्तिजनक होते हैं, इसलिए हम अपशब्दों का उपयोग करने की अनुमति नहीं देते हैं, बशर्ते कि यूज़र ने स्पष्ट तौर पर यह न बता दिया हो कि [वह अपशब्द] किसी की निंदा करने, कोई चर्चा करने, उस अपशब्द के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए शेयर किया गया था या यह कि उस अपशब्द का उपयोग खुद के संदर्भ में या सशक्तिकरण करने वाले तरीके से किया गया था.”

इस संबंध में कि क्या इस कंटेंट को ख़बरों में रहने लायक अनुमति मिल सकती है, Facebook ने बताया कि ख़बरों में रहने लायक अनुमति केवल तभी मिल सकती है, जब शुरुआत में कंटेंट का रिव्यू करने वाले मॉडरेटर्स उसका फिर से रिव्यू करने के लिए उसे Facebook की कंटेंट पॉलिसी टीम के पास भेजने का फ़ैसला लें – इस केस में उस कंटेंट को अतिरिक्त रिव्यू के लिए आगे नहीं भेजा गया था. बोर्ड ने ध्यान दिया कि Facebook ने किसी केस को अतिरिक्त रिव्यू के लिए अगले स्तर पर भेजने के मापदंडों को सार्वजनिक नहीं किया है. उसने कहा कि “ऐसे कंटेंट को सैद्धांतिक तौर पर ख़बरों में रहने लायक अनुमति मिल सकती है. हालाँकि इस केस में अपने आप में आपत्तिजनक और अपमानजनक शब्द वाले कंटेंट को Facebook प्लेटफ़ार्म पर रहने देने से होने वाले नुकसान का जोखिम जनहित के महत्व से ज़्यादा नहीं था.”

7. थर्ड पार्टी सबमिशन

इस केस के संबंध में ओवरसाइट बोर्ड को लोगों की ओर से 18 कमेंट मिले. पाँच कमेंट एशिया पैसिफ़िक और ओशेनिया से, एक यूरोप से, सात लैटिन अमेरिका और कैरिबियन से, एक मध्य पूर्व और उत्तरी अफ़्रीका से और चार अमेरिका और कनाडा से सबमिट किए गए थे.

इन कमेंट में ये विषय-वस्तु शामिल थीं: कोलंबिया में “m**ica” शब्द के विभिन्न अर्थ और उपयोग; इससे संबंधित चिंता कि Facebook पत्रकारिता वाले कंटेंट को हटा देता है; कोलंबिया में मीडिया आउटलेट की सेंशरशिप; इसका विश्लेषण कि कंटेंट कम्युनिटी स्टैंडर्ड का पालन कर रहा था या नहीं.

इस केस को लेकर लोगों की ओर से सबमिट किए गए कमेंट देखने के लिए कृपया यहाँ पर क्लिक करें.

8. ओवरसाइट बोर्ड का विश्लेषण

बोर्ड ने इस सवाल पर ध्यान दिया कि क्या इन तीन दृष्टिकोणों से इस कंटेंट को रीस्टोर कर दिया जाना चाहिए: Facebook कम्युनिटी स्टैंडर्ड; इस कंपनी के मूल्य; और मानवाधिकारों से जुड़ी इनकी ज़िम्मेदारियाँ.

8.1 कम्युनिटी स्टैंडर्ड का अनुपालन

बोर्ड ने कहा कि, हालाँकि कंटेंट को हटाने का Facebook का फ़ैसला ऊपरी तौर पर से उसके नफ़रत फैलाने वाली भाषा के कम्युनिटी स्टैंडर्ड के अनुरूप था (इसका मतलब है कि एक नज़र में देखने पर लगता है कि कंटेंट ने स्टैंडर्ड का उल्लंघन किया), लेकिन इस मामले में कंटेंट को प्लेटफ़ॉर्म पर बनाए रखने के लिए खबरों में रहने लायक होने की अनुमति दी जानी चाहिए थी.

“m**ica” शब्द Facebook के द्वारा इस आधार पर अपशब्द माना गया है कि यह अपने आप में ही आपत्तिजनक है और इसका उपयोग मुख्य रूप से समलैंगिक पुरुषों के विरुद्ध अपमानजनक और भेदभावपूर्ण शब्द के तौर पर किया जाता है. जैसा कि सेक्शन 6 में बताया गया है, Facebook ने बोर्ड को समझाया कि इस पॉलिसी के एन्फ़ोर्समेंट पर न तो टार्गेट की यौन रुचि और न ही उसके सार्वजनिक हस्ति होने का कोई प्रभाव पड़ेगा. क्योंकि भेदभावपूर्ण अपशब्द निहित रूप से आपत्तिजनक होते हैं, इसलिए किसी भी पॉलिसी अपवाद के अलावा इनके उपयोग की परमिशन नहीं है. अपवाद तब माने जाते हैं जब निंदा करने, चर्चा करने या नफ़रत फैलाने वाली भाषा के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए या आत्म-संदर्भित रूप से या सशक्त तरीके से अपशब्दों का उपयोग किया जाता है.

बोर्ड ने इस बात की पुष्टि के लिए विशेषज्ञों की राय और पब्लिक कमेंट लिए कि “m**ica” शब्द के एक से अधिक अर्थ हैं और इसका उपयोग बिना भेदभाव के किया जा सकता है. हालांकि इस बात पर सहमति है कि यह मूलत: समलैंगिकता से जुड़ा है और अधिकतर समलैंगिक पुरुषों के खिलाफ़ ही इसका उपयोग होता है, जबकि कोलंबिया में अब इसका उपयोग किसी व्यक्ति को "दोस्त" या "यार" के रूप में संबोधित करने और "बेवकूफ", "बुद्धू" या "मूर्ख" जैसे अपमानजनक शब्द के रूप में किया जाता है. बोर्ड का मानना है कि शब्द के इस उद्भव या सामान्यीकरण का मतलब यह नहीं है कि यह समलैंगिक पुरुषों के लिए कम हानिकारक है, क्योंकि सामान्यत: इसका उपयोग समलैंगिक, उभयलिंगी और ट्रांसजेंडर (LGBT) लोगों और कम्युनिटी को नकारात्मक विशेषताओं के साथ जोड़कर उन्हें नज़रंदाज़ करना जारी रख सकता है.

बोर्ड जानता है कि Facebook ने इस शब्द को अपशब्द क्यों माना है और इस बात को भी मानता है कि नफ़रत फैलाने वाली भाषा से जुड़े स्टैंडर्ड में दिया गया कोई भी अपवाद प्लेटफ़ॉर्म पर इसके उपयोग की स्पष्ट अनुमति नहीं देता है. इसके बावजूद बोर्ड का मानना है कि खबरों में रहने लायक होने की अनुमति लागू करके इस कंटेंट को प्लेटफ़ॉर्म पर बनाए रखना चाहिए था.

केस 2021-001-FB-FBR में खबरों में बने रहने की योग्यता के बारे में बोर्ड के सुझाव को लेकर Facebook ने और सार्वजनिक जानकारी दी है. इस योग्यता की अनुमति देने के लिए कंपनी को उल्लंघन करने वाले कंटेंट से होने वाले नुकसान के जोखिम के विरुद्ध कुछ अभिव्यक्तियों को अनुमति देने के जनहित का मूल्यांकन करना होता है. Facebook का कहना है कि वह संबंधित देश की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, भाषा की प्रकृति को भी देखता है, इसमें यह भी देखा जाता है कि क्या यह शासन या राजनीति से संबंधित है, और देश की राजनैतिक संरचना के साथ यह भी देखा जाता है कि स्वतंत्र प्रेस है या नहीं. यह योग्यता वक्ता की पत्रकार या मीडिया कंपनी के रूप में पहचान होने की वजह से लागू नहीं होती, ना ही यह इसलिए लागू होती है कि विषय खबरों में आ रहा है.

इस कंटेंट में सार्वजनिक लाभ का आकलन करने के लिए विभिन्न प्रासंगिक कारक हैं. यह तब पोस्ट किया गया था जब कोलंबिया की सरकार के खिलाफ़ बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन चल रहे थे. वीडियो में आ रही आवाज़ में मुख्यत: राष्ट्रपति की आलोचना के स्वर सुनाई दे रहे थे. शामिल होने वाले लोग जान करके अपशब्द का उपयोग कर रहे थे, लेकिन विरोध अपने उद्देश्य में भेदभावपूर्ण नहीं था. कई अन्य शब्दों के अलावा एक बार अपशब्द का उपयोग किया गया. जहाँ भी ऐसा हो कि यूज़र विरोध प्रदर्शन के बारे में जागरुकता फैलाने के लिए और उनके उद्देश्य के लिए समर्थन दिखाने के लिए फ़ुटेज शेयर करता है, ना कि संरक्षित विशिष्टताओं के आधार पर लोगों का अपमान करने या भेदभाव या हिंसा न भड़काने के लिए, तो खबरों में बने रहने लायक वाला अपवाद विशेष रूप से लागू होता है.

बोर्ड ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस मामले में खबरों में रहने लायक होने की अनुमति को लागू किए जाने को विरोध प्रदर्शन करने वालों द्वारा उपयोग की जाने वाली भाषा के समर्थन के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए. बोर्ड मानता है कि इस वीडियो में प्रदर्शन करने वालों द्वारा उपयोग किया गया शब्द कोलंबिया सहित समलैंगिक पुरुषों के लिए अपमानजनक है और इसका उपयोग नुकसान का जोखिम पैदा कर सकता है. प्लेटफ़ॉर्म पर इस तरह के अपशब्दों की परमिशन देने से LGBT कम्युनिटी के लोगों को डराने-धमकाने और बहिष्कार के माहौल में योगदान मिल सकता है और कुछ मामलों में वास्तविक दुनिया में हिंसा को बढ़ावा मिलता है. यह भाषा स्वाभाविक रूप से जनहित की नहीं है. बल्कि, सार्वजनिक हित प्लेटफ़ॉर्म पर अभिव्यक्ति की परमिशन देने में है जो कोलंबिया के राजनैतिक इतिहास के महत्वपूर्ण पल से संबंधित है.

बोर्ड यह भी मानता है कि सोशल मीडिया ने पत्रकारों सहित सभी लोगों के लिए एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो ऐसे माहौल में विरोध के बारे में जानकारी शेयर करता है, जहाँ सार्वजनिक कमेंट और विशेषज्ञों की रिपोर्ट यह पता चलता कि अधिक बहुलता से मीडिया परिदृश्य को लाभ होता है. ख़बरों में रहने लायक होने की अनुमति लागू करके परमिशन देने का मतलब यह है कि केवल अपवाद वाले और कम नुकसानदेह कंटेंट को ही अनुमति दी जाएगी. ख़बरों में रहने लायक होने के अपवाद को नफ़रत फैलाने वाली भाषा को बनाए रखने की व्यापक परमिशन के रूप में नहीं माना जाना चाहिए.

8.2 Facebook के मूल्यों का अनुपालन

बोर्ड मानता है कि इस कंटेंट को रीस्टोर करना Facebook के मूल्यों के अनुरूप है. Facebook में “गरिमा” को एक महत्वपूर्ण मूल्य माना गया है. बोर्ड Facebook की इस चिंता को समझता है कि नफ़रत से भरे अपशब्दों को प्लेटफ़ॉर्म पर बने रहने की परमिशन देने से, कम्युनिटी के उन सम्मानित सदस्यों की गरिमा को ठेस पहुँच सकती है जिनके लिए ये शब्द कहे जाते हैं. बोर्ड यह भी स्वीकार करता है कि इस विशेष मामले में अपशब्द का उपयोग LGBT कम्युनिटी के सदस्यों के लिए अपमानजनक और हानिकारक हो सकता है.

इसके साथ Facebook ने यह भी कहा कि "अभिव्यक्ति" इसका केवल एक मूल्य नहीं बल्कि सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण मूल्य है. राजनैतिक नेता के खिलाफ व्यापक विरोध दिखाने वाले कंटेंट को शेयर करना "अभिव्यक्त" के मूल्य को उत्तम तरीके से प्रदर्शित करता है, वह भी एक ऐसे माहौल में जहाँ राजनैतिक अभिव्यक्ति के निकास सीमित हैं. इस मामले में अपशब्दों से जुड़ी पॉलिसी के लिए खबरों में रहने लायक होने की अनुमति को लागू करना—एक राष्ट्रीय नेता के खिलाफ़ राजनैतिक विरोध से जुड़ी जानकारी शेयर करना—Facebook को "गरिमा" के लिए अपनी वैध प्रतिबद्धता का त्याग किए बिना "अभिव्यक्ति" के लिए अपनी सर्वोपरि प्रतिबद्धता का सम्मान करने की परमिशन देता है.

8.3 Facebook की मानवाधिकार से जुड़ी ज़िम्मेदारियों का अनुपालन

बोर्ड ने माना कि कंटेंट को रीस्टोर करना, एक बिज़नेस के तौर पर Facebook की मानवाधिकार ज़िम्मेदारियों से संगत है. Facebook ने बिज़नेस और मानव अधिकारों के बारे में संयुक्त राष्ट्र संघ के मार्गदर्शक सिद्धांत (UNGP) के तहत मानवाधिकारों का सम्मान करने के लिए स्वयं को प्रतिबद्ध रखा है. इसकी कॉर्पोरेट मानवाधिकार पॉलिसी में बताया गया है कि इसमें नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिज्ञापत्र (ICCPR) शामिल है.

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19 और 21 ICCPR)

ICCPR के अनुच्छेद 19 में अभिव्यक्ति की विस्तृत सुरक्षा का प्रावधान है. "लोकतांत्रिक समाज में सार्वजनिक और राजनैतिक क्षेत्र के लोगों से संबंधित सार्वजनिक चर्चा" के लिए यह सुरक्षा "विशेष रूप से अधिक" होती है ( सामान्य कमेंट 34, पैरा. 34). ICCPR का अनुच्छेद 21 शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता के लिए समान सुरक्षा देता है - राजनैतिक संदेश देने वाली सभाओं को उच्च सुरक्षा दी जाती है ( सामान्य कमेंट संख्या 37, पैरा 32 और 49), और अनुच्छेद 21 ऑनलाइन होने वाली संबद्ध गतिविधियों की सुरक्षा करता है ( Ibid., पैरा 6, और 34). इसके आगे मानवाधिकार समिति ने पत्रकारों, मानवाधिकार रक्षकों और चुनाव की निगरानी करने वालों और सभाओं की निगरानी या रिपोर्टिंग करने वाले, जिसमें कानून प्रवर्तन अधिकारियों के आचरण के संबंध में रिपोर्ट करना भी शामिल है, अन्य लोगों की भूमिका पर ज़ोर दिया है (Ibid., पैरा 30 और 94). सभाओं के बारे में ऑनलाइन संचार में हस्तक्षेप को शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता के अधिकार में बाधा डालने के रूप में परिभाषित किया गया है ( Ibid., पैरा. 10).

अनुच्छेद 19 के अनुसार जहाँ राज्य अभिव्यक्ति पर प्रतिबंध लागू करता है, वहाँ प्रतिबंधों को वैधानिकता, वैधानिक लक्ष्य और आवश्यकता तथा अनुपात की शर्तों को पूरा करना ज़रूरी होता है (अनुच्छेद 19, पैरा. 3, ICCPR).

Facebook UNGP के तहत अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार स्टैंडर्ड का सम्मान करने की अपनी ज़िम्मेदारी को जान चुका है. UNGP के फ़्रेमवर्क के आधार पर, विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष रैपर्टर ने सोशल मीडिया कंपनियों से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि कंटेंट संबंधी उनके नियम अनुच्छेद 19, पैरा. 3, ICCPR के मार्गदर्शन में बनाए जाएँ (देखें A/HRC/38/35, पैरा. 45 और 70). बोर्ड ने जाँचा कि क्या Facebook की मानवाधिकार जिम्मेदारियों के अनुसार अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध के लिए इस तीन-भाग परीक्षण के तहत पोस्ट को हटाना उचित होगा या नहीं.

I. वैधानिकता (नियमों की स्पष्टता और सुलभता)

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत वैधानिकता के सिद्धांत के अनुसार अभिव्यक्ति पर रोक लगाने के लिए नियम स्पष्ट, सटीक, आसानी से उपलब्ध और गैर भेदभावपूर्ण होने चाहिए ( सामान्य कमेंट 34, पैरा. 25 और पैरा. 26). मानवाधिकार समिति ने आगे कहा है कि नियमों "का कार्यान्वयन करने वाले लोगों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाने के निरंकुश निर्णय नहीं लेने दे सकते" (सामान्य कमेंट 34, पैरा. 25).

हालाँकि Facebook की नफ़रत फैलाने वाली भाषा से जुड़े स्टैंडर्ड में सपष्ट रूप से बताया गया है कि सुरक्षित विशिष्टताओं से जुड़े अपशब्द प्रतिबंधित हैं, लेकिन Facebook ने विभिन्न संदर्भों में अपशब्दों के रूप में जिन शब्दों की लिस्ट बनाई है, वे सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं. यह देखते हुए कि "m**ica" शब्द का उपयोग अलग-अलग तरीकों से किया जा सकता है, यूज़र के लिए यह स्पष्ट नहीं हो पाता है कि यह शब्द Facebook के अपशब्दों पर प्रतिबंध का उल्लंघन करता है. Facebook को अपशब्दों की लिस्ट के बारे में लोगों को अधिक जानकारी देनी चाहिए ताकि यूज़र्स उस तरह से अपने आचरण को नियमित कर सकें. बोर्ड ने नीचे इस बारे में एक पॉलिसी का सुझाव दिया है.

बोर्ड ने केस 2021-001-FB-FBR में सुझाव दिया है कि Facebook ज़्यादा से ज़्यादा जानकारी उपलब्ध करवाए ताकि यूज़र्स को ख़बरों में रहने लायक होने की अनुमति लागू करने की प्रक्रिया और मानदंडों को समझने और मूल्यांकन करने में मदद मिले. जवाब में Facebook ने अपने ट्रांसपेरेंसी सेंटर में और अधिक जानकारी प्रकाशित की और कहा कि 2022 से वह इस बारे में कम्युनिटी स्टैंडर्ड एन्फ़ोर्समेंट रिपोर्ट में नियमित अपडेट देना शुरू करेगा कि उसने कितनी बार यह अनुमति लागू की. हालाँकि ट्रांसपेरेंसी सेंटर रिसोर्स, कम्युनिटी स्टैंडर्ड के परिचय में ख़बरों में रहने लायक होने की अनुमति की बहुत सीमित व्याख्या से नहीं जुड़ा है. जबकि बोर्ड एन्फ़ोर्समेंट रिपोर्ट में अधिक जानकारी देने की प्रतिबद्धता को मानता है, यह उन यूज़र्स को जानकारी नहीं देगा जो ऐसा कंटेंट पोस्ट करते हैं या देखते हैं जिस पर ख़बरों में रहने लायक होने की अनुमति लागू की गई है.

बोर्ड ने केस 2020-003-FB-UA में सुझाव दिया था कि Facebook को यूज़र्स को नफ़रत फैलाने वाली भाषा की पॉलिसी के उन विशिष्ट हिस्सों के बारे में अधिक जानकारी देनी चाहिए जिनका उनके कंटेंट ने उल्लंघन किया है, ताकि यूज़र्स उस तरह से अपने आचरण को नियमित कर सकें. बोर्ड कहता है कि इस जगह पर एक अंतर रखना होगा. केस 2020-003-FB-UA में जो कंटेंट था वह यूज़र्स ने स्वयं बनाया था जिसे नोटिफ़िकेशन दे कर आसानी से अपडेट किया जा सकता था, जबकि वर्तमान में जो मामला है उसमें पब्लिक ईवेंट दर्शाने वाला कंटेंट है. फिर भी, बोर्ड समझता है कि एक सामान्य नियम के रूप में यूज़र्स के लिए यह स्पष्ट जानकारी प्राप्त करना महत्वपूर्ण है कि उनके कंटेंट को क्यों हटाया गया है. बोर्ड जुलाई 2021 में Facebook द्वारा दिए गए अपडेट की प्रशंसा करता है, जिसमें कंपनी द्वारा इस सुझाव को लागू किए जाने के प्रयास किए गए, इसे सभी भाषाओं में जारी किया जाएगा ताकि उन सभी यूज़र्स को अधिक जानकारी दी जाएगी जिनके कंटेंट को अपशब्दों के उपयोग के कारण हटा दिया गया है. बोर्ड गैर-अंग्रेजी भाषाओं में इस सुझाव को लागू करने के लिए स्पष्ट समय सीमा बताने के लिए Facebook को प्रोत्साहित करता है.

II. वैधानिक लक्ष्य

अभिव्यक्ति से संबंधित प्रतिबंध में ICCPR में सूचीबद्ध वैधानिक लक्ष्यों में से किसी एक का अनुसरण किया जाना चाहिए, जिसमें "अन्य लोगों के अधिकार" शामिल हैं. इस केस में जिस पॉलिसी की बात की गई है, उसमें यौन रुचि और लैंगिक पहचान के आधार पर समानता, हिंसा और भेदभाव से रक्षा के दूसरे लोगों के अधिकारों की रक्षा के वैधानिक लक्ष्य (सामान्य कमेंट सं. 34, पैरा. 28) का अनुसरण किया गया (अनुच्छेद 2, पैरा. 1, अनुच्छेद 26 ICCPR; संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति, तूनेन वि. ऑस्ट्रेलिया (1992) और सामान्य कमेंट सं. 37, पैरा. 25; लोगों को यौन रुचि और लैंगिक पहचान के आधार पर हिंसा और भेदभाव से सुरक्षित रखने के बारे में संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवाधिकार समिति द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव 32/2.

III. आवश्यकता और आनुपातिकता

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगाए जाने वाले सभी प्रतिबंध उनके सुरक्षात्मक कार्य को पूरा करने के लिए उपयुक्त होने चाहिए; वे अपने सुरक्षात्मक कार्य कर सकने वाले उपायों में से कम से कम हस्तक्षेप करने वाले उपाय होने चाहिए (सामान्य कमेंट 34, पैरा. 34).

बोर्ड ने कहा कि इस मामले में कंटेंट को हटाना ज़रूरी या आनुपातिक नहीं था. जैसा कि ऊपर सेक्शन 8.1 में कहा गया है, बोर्ड LGBT के लोगों के अधिकारों को समलैंगिक अपशब्दों को प्लेटफॉर्म पर बने रहने की अनुमति देने से होने वाली हानि को समझता है. हालाँकि, कंटेंट को हटाने की आनुपातिकता का आकलन करने में संदर्भ महत्वपूर्ण है. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष रैपर्टर में नफ़रत फैलाने वाली भाषा के बारे में बताया गया है कि “कुछ मामलों में संदर्भ का मूल्यांकन करने से कंटेंट को अपवाद के तौर पर छूट देने के फ़ैसले भी लिए जा सकते हैं, जैसे की राजनैतिक मामलों पर आधारित बातचीत के जैसे कंटेंट की रक्षा की जानी चाहिए” (A/74/486, पैरा. 47(d)).

कोलंबिया में राजनैतिक संदर्भ को ध्यान में रखते हुए, इस विरोध में एक राजनैतिक व्यक्ति को संबोधित किया गया, और सोशल मीडिया ने वहाँ विरोध प्रदर्शनों के बारे में जानकारी शेयर करने में जो महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, बोर्ड ने पाया कि LGBT लोगों के गैर-भेदभाव और समानता के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए इस कंटेंट को हटाना आनुपातिक नहीं था.

शांतिपूर्ण तरीके से किसी जगह पर इकट्ठा होने की स्वतंत्रता:

बोर्ड के कुछ लोगों के लिए, शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता के अधिकार पर इसके प्रभाव के लिए इस मामले में कंटेंट प्रतिबंध का आकलन करना भी महत्वपूर्ण है. पत्रकार और अन्य पर्यवेक्षक उन घटनाओं के ऑनलाइन प्रसार के माध्यम से संयुक्त अभिव्यक्ति और विरोध की संयुक्त शक्ति को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं - ये कार्य ICCPR के अनुच्छेद 21 द्वारा संरक्षित हैं (सामान्य कमेंट संख्या 37, पैरा. 34).

कुछ लोगों का मानना है कि शांतिपूर्ण सभा के अधिकार पर प्रतिबंधों का आकलन बहुत हद तक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर लागू प्रतिबंधों के मूल्यांकन के परीक्षण के समान है. शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता के अधिकार पर प्रतिबंध, वैधता, वैध उद्देश्य और आवश्यकता और आनुपातिकता की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए, सटीक रूप से लगाया जाना चाहिए( ibid., पैरा 8 और 36). शांतिपूर्ण सभा और संगठन की स्वतंत्रता पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष रैपर्टर ने “Facebook की विशाल ताकत” पर कमेंट करते हुए, कंटेंट मॉडरेशन में लगी कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून (A/HRC/41/41, पैरा. 19 देखें) द्वारा निर्देशित होने का भी आह्वान किया है ( Ibid., पैरा. 4). मानवाधिकार समिति ने कहा है कि कम्युनिकेशन प्लेटफ़ॉर्म के निजी स्वामित्व को कानूनी फ़्रेमवर्क की उस सामयिक समझ की जानकारी देनी चाहिए जो ICCPR के अनुच्छेद 21 के अनुसार ज़रूरी है (पैरा. 10 और 34 में बताए अनुसार).

ऊपर दिया गया तीन-भाग वाला विश्लेषण, जिसमें कुछ ही लोग शामिल होते हैं, एक अतिरिक्त अल्पसंख्यक निष्कर्ष की ओर ले जाता है कि इस मामले में, Facebook द्वारा कंटेंट को हटाने से शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता का अधिकार प्रभावित होता है, और यह प्रतिबंध उचित नहीं था.

9. ओवरसाइट बोर्ड का फ़ैसला

ओवरसाइट बोर्ड ने Facebook के कंटेंट हटाने के फ़ैसले को बदल दिया है और पोस्ट को रीस्टोर करने के लिए कहा है.

10. पॉलिसी से जुड़े सुझाव का कथन

इन सुझावों की गिनती की जाती है और बोर्ड यह अनुरोध करता है कि Facebook ड्राफ़्ट किए गए अनुसार हर सुझाव के अलग-से जवाब दे.

कंटेंट पॉलिसी

यूज़र्स के लिए नफ़रत फैलाने वाली भाषा पर अपने नियमों को और स्पष्ट करने के लिए और खबरों में रहने लायक होने की अनुमति कैसे लागू होती है यह बताने के लिए, Facebook को:

1. अपने नफ़रत फैलाने वाली भाषा से जुड़े कम्युनिटी स्टैंडर्ड के तहत, उल्लंघन के रूप में नामित अपशब्दों की लिस्ट से व्याख्यात्मक उदाहरण प्रकाशित करना चाहिए. इन उदाहरणों को कम्युनिटी स्टैंडर्ड में शामिल किया जाना चाहिए और इसमें ऐसे शब्द शामिल होने चाहिए जो कुछ संदर्भों में हानिकारक हो सकते हैं लेकिन अन्य में नहीं, और यह वर्णन करना चाहिए कि उनका उपयोग कब उल्लंघन कहलाएगा. Facebook को यूज़र्स को यह भी बताना चाहिए कि यह लिस्ट पूरी सूची नहीं है.

2. कम्युनिटी स्टैंडर्ड के परिचय में दी गई ख़बरों में रहने लायक होने की परमिशन को ट्रांसपेरेंसी सेंटर में दिए गए विस्तृत स्पष्टीकरण से लिंक करे कि यह पॉलिसी कैसे लागू होती है. कंपनी को इस स्पष्टीकरण के साथ बड़े स्तर के विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग सहित कई तरह के संदर्भों के व्याख्यात्मक उदाहरण भी देने चाहिए.

एन्फ़ोर्समेंट

सार्वजनिक हित में गलत तरीके से कंटेंट को हटाने से बचाव के लिए, और ऐसे कंटेंट की रिपोर्ट करने वाले यूज़र्स को पर्याप्त जानकारी का प्रावधान सुनिश्चित करने के लिए, Facebook को:

3. संभावित रूप से कम्युनिटी स्टैंडर्ड का उल्लंघन करने वाले, लेकिन ख़बरों में रहने लायक होने की अनुमति पाने योग्य जनहित के कंटेंट को अतिरिक्त रिव्यू के लिए कंटेंट रिव्यूअर्स के पास भेजने हेतु स्पष्ट मापदंड तैयार करने चाहिए और उनका प्रचार करना चाहिए. इन मापदंडों में राजनैतिक मुद्दों पर बड़े विरोध को दर्शाने वाला कंटेंट शामिल होना चाहिए, विशेष रूप से उन संदर्भों में जहाँ राज्यों पर मानवाधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया जाता है और जहाँ घटनाओं का सार्वजनिक रिकॉर्ड बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है.

4. जो मूल्यांकन के बाद उल्लंघन करने वाला था लेकिन जनहित के कारणों से उसे प्लेटफ़ॉर्म पर रहने दिया गया हो, ऐसे कंटेंट की रिपोर्ट करने वाले सभी यूज़र्स को सूचना दे कि पोस्ट को ख़बरों में रहने लायक अनुमति दी गई थी. नोटिस को खबरों में रहने लायक होने की अनुमति के ट्रांसपेरेंसी सेंटर के स्पष्टीकरण से जोड़ा जाना चाहिए.

*प्रक्रिया संबंधी नोट:

ओवरसाइट बोर्ड के फ़ैसले पाँच सदस्यों के पैनल द्वारा लिए जाते हैं और बोर्ड के अधिकांश सदस्य इन पर सहमति देते हैं. ज़रूरी नहीं है कि बोर्ड के फ़ैसले उसके हर एक मेंबर की निजी राय को दर्शाएँ.

इस केस के फ़ैसले के लिए, बोर्ड की ओर से स्वतंत्र शोध को अधिकृत किया गया. एक स्वतंत्र शोध संस्थान जिसका मुख्यालय गोथेनबर्ग यूनिवर्सिटी में है और छह महाद्वीपों के 50 से भी ज़्यादा समाजशास्त्रियों की टीम के साथ ही दुनिया भर के देशों के 3,200 से भी ज़्यादा विशेषज्ञों ने सामाजिक-राजनैतिक और सांस्कृतिक संदर्भ में विशेषज्ञता मुहैया कराई है. Lionbridge Technologies, LLC कंपनी ने भाषा संबंधी विशेषज्ञता की सेवा दी, जिसके विशेषज्ञ 350 से भी ज़्यादा भाषाओं में अपनी सेवाएँ देते हैं और वे दुनिया भर के 5,000 शहरों से काम करते हैं.

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