पलट जाना

ओजलान का एकांतवास

ओवरसाइट बोर्ड ने Facebook के उस मूल फ़ैसले को बदल दिया है, जिसके तहत कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (PKK) के संस्थापक सदस्य अब्दुल्ला ओजलान के एकांत कारावास पर बहस करने के लिए लोगों को बढ़ावा देने वाली एक Instagram पोस्ट को निकाल दिया गया था.

निर्णय का प्रकार

मानक

नीतियां और विषय

विषय
अधिकारहीन कम्युनिटी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, गलत जानकारी
सामुदायिक मानक
ख़तरनाक लोग और संगठन

क्षेत्र/देश

जगह
अमेरिका, तुर्की

प्लैटफ़ॉर्म

प्लैटफ़ॉर्म
Instagram

संलग्नक

2021-006-IG-UA Public Comments

इस पूरे फ़ैसले को उत्तरी कुर्द की भाषा में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें.

Ji bo hûn ev biryar bi Kurdiya Bakur bixwînin, li vir bitikînin.

केस का सारांश

ओवरसाइट बोर्ड ने Facebook के उस मूल फ़ैसले को बदल दिया है, जिसके तहत कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (PKK) के संस्थापक सदस्य अब्दुल्ला ओजलान के एकांत कारावास पर बहस करने के लिए लोगों को बढ़ावा देने वाली एक Instagram पोस्ट को निकाल दिया गया था. संबंधित यूज़र की अपील पर बोर्ड द्वारा इस केस को रिव्यू के लिए चुनने के बाद Facebook ने यह निष्कर्ष निकाला कि उस कंटेंट को गलती से हटाया गया था और उसे रीस्टोर कर दिया. बोर्ड को इस बात की चिंता है कि Facebook आंतरिक पॉलिसी से जुड़े एक अपवाद से तीन सालों तक अनभिज्ञ रहा और शायद इस वजह से कई अन्य पोस्ट को हटाने की गलती की गई हो.

केस की जानकारी

यह केस PKK के संस्थापक सदस्य अब्दुल्ला ओजलान से जुड़ा हुआ है. यह गुट स्वतंत्र कुर्द राज्य बनाने के अपने लक्ष्य को पूरा करने की कोशिश में हिंसा का रास्ता अपनाता है. खतरनाक लोग और संगठन से जुड़ी Facebook की पॉलिसी के तहत PKK और ओजलान, दोनों को ही खतरनाक घोषित किया हुआ है.

25 जनवरी 2021 को अमेरिका के एक Instagram यूज़र ने ओजलान की फ़ोटो पोस्ट की, जिसमें अंग्रेज़ी में लिखा था “y’all ready for this conversation” (“आप सब इस बारे में बात करने के लिए तैयार हैं”). कैप्शन में उस यूज़र ने लिखा कि तुर्की के इमराली आइलैंड की जेल में कैद ओजलान का एकांतवास खत्म करने के लिए आवाज़ उठाने का समय आ गया है. उन्होंने पाठकों को प्रोत्साहित किया कि वे ओजलान को बंदी बनाने और अमानवीय तरीके का एकांत कारावास देने के बारे में आवाज़ उठाएँ.

किसी मॉडरेटर द्वारा मूल्यांकन किए जाने के बाद खतरनाक लोग और संगठन से जुड़े Facebook के नियमों के तहत उस पोस्ट को ओजलान और PKK के समर्थन में एक्शन लेने की अपील मानते हुए 12 फ़रवरी को हटा दिया गया. जब संबंधित यूज़र ने इस फ़ैसले को लेकर अपील की, तो उन्हें कहा गया कि COVID-19 के कारण Facebook के रिव्यू करने की क्षमता में आई अस्थायी कमी के चलते उनकी अपील का रिव्यू नहीं किया जा सकेगा. हालाँकि, एक अन्य मॉडरेटर ने उस कंटेंट का रिव्यू किया और उससे वही पॉलिसी का उल्लंघन होने की बात सामने आई. फिर संबंधित यूज़र ने ओवरसाइट बोर्ड के सामने अपील पेश की.

बोर्ड द्वारा इस केस को चुने जाने और पैनल को असाइन किए जाने के बाद Facebook को पता चला कि खतरनाक लोग और संगठन से जुड़ी पॉलिसी के आतंरिक दिशा निर्देशों के एक हिस्से को 2018 में नए रिव्यू सिस्टम में “भूलवश ट्रांसफ़र नहीं किया गया” था. यह दिशा निर्देश ओजलान के कारावास की परिस्थितियों को लेकर सामने आई समस्या से निपटने के लिए 2017 में आंशिक रूप से तैयार किया गया था, जो खतरनाक घोषित व्यक्तियों के एकांत कारावास की परिस्थितियों पर चर्चा करने की परमिशन देता है.

इस दिशा निर्देश के अनुसार ही Facebook ने 23 अप्रैल को Instagram पर उस कंटेंट को रीस्टोर किया था. Facebook ने बोर्ड को बताया कि फ़िलहाल वे अपनी पॉलिसी से जुड़े एक अपडेट को लेकर काम कर रहे हैं, ताकि खतरनाक घोषित व्यक्तियों के मानवाधिकारों पर यूज़र्स को चर्चा करने की परमिशन मिल सके. कंपनी ने बोर्ड से इन पॉलिसी को बेहतर बनाने के तरीके पर इनसाइट और दिशा निर्देश माँगा है. जबकि Facebook ने 23 जून 2021 को खतरनाक लोगों और संगठनों से जुड़े अपने कम्युनिटी स्टैंडर्ड को अपडेट किया था, तो इन बदलावों का प्रभाव सीधे तौर पर उस दिशा निर्देश पर नज़र नहीं आता है, जिसका अनुरोध इस कंपनी ने बोर्ड से किया है.

मुख्य निष्कर्ष

बोर्ड ने पाया कि उस कंटेंट को निकालने का Facebook का मूल फ़ैसला कंपनी के कम्युनिटी स्टैंडर्ड के अनुसार नहीं था. जैसा कि भूलवश शामिल नहीं हो पाया आंतरिक दिशा निर्देश कहता है कि यूज़र्स किसी ऐसे व्यक्ति के एकांत कारावास के हालातों के बारे में चर्चा कर सकते हैं, जिसे खतरनाक घोषित किया हुआ है, इसलिए Facebook के नियमों के तहत ऐसी पोस्ट की जा सकती थी.

बोर्ड को इस बात की चिंता है कि Facebook पॉलिसी से जुड़े एक महत्वपूर्ण अपवाद के दिशा निर्देश से तीन सालों तक अनभिज्ञ रहा. ऐसा कंटेंट जिसमें खतरनाक घोषित व्यक्तियों के लिए “सपोर्ट” नज़र आता है, उसे डिफ़ॉल्ट रूप से हटाने की Facebook की पॉलिसी औरवहीं लोगों से महत्वपूर्ण अपवाद को छिपाए रखने से यह गलती काफ़ी लंबे समय तक किसी की नज़र में नहीं आई. Facebook को केवल उस यूज़र की वजह से लागू नहीं की जा रही इस पॉलिसी के बारे में पता चला, जिसने कंपनी के फ़ैसले के खिलाफ़ बोर्ड के सामने अपील पेश करने का फ़ैसला लिया.

हालाँकि Facebook ने बोर्ड को बताया है कि वह यह पता लगाने के लिए रिव्यू करवा रहा है कि आखिर यह दिशा निर्देश उनके नए रिव्यू सिस्टम में ट्रांसफ़र क्यों नहीं हुआ, उन्होंने यह भी कहा कि “तकनीकी रूप से यह पता लगा पाना संभव नहीं है कि रिव्यूअर्स को जब यह दिशा निर्देश उपलब्ध नहीं था, तब ऐसे कितने कंटेंट को हटाया गया होगा.” बोर्ड को लगता है कि Facebook की गलती से ऐसी कई अन्य पोस्ट को गलत तरीके से हटाया गया होगा और Facebook की ट्रांसपेरेंसी रिपोर्टिंग यह पता लगाने के लिए पर्याप्त नहीं है कि क्या इस प्रकार की गलती सिस्टम संबंधी समस्या को दर्शाती है. इस केस में Facebook के एक्शन से पता चलता है कि कंपनी ने मानवाधिकार से जुड़ी अपनी कॉर्पोरेट पॉलिसी (सेक्शन 3) की अवहेलना तो की ही, वहीं समाधान के अधिकार का ध्यान भी नहीं रख सकी.

यहाँ तक कि भूलवश गायब हुए दिशा निर्देश की खोज के बिना भी उस कंटेंट को कभी-भी नहीं हटाया जाना चाहिए था. संबंधित यूज़र ने अपनी पोस्ट में हिंसा की वकालत नहीं की गई थी और न ही ओजलान की विचारधारा और PKK का समर्थन किया गया था. इसके बजाय उन्होंने ओजलान के लंबे समय से जारी एकान्त कारावास को लेकर मानवाधिकारों से जुड़ी चिंताओं को सामने लाने की कोशिश की थी, जिस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ भी उठा रही हैं. चूँकि इस पोस्ट से नुकसान होने की संभावना नहीं थी, इसलिए इसे हटाना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के तहत आवश्यक या सही नहीं था.

ओवरसाइट बोर्ड का फ़ैसला

ओवरसाइट बोर्ड ने संबंधित कंटेंट को हटाने के Facebook के मूल फ़ैसले से असहमति जताते हुए उसे बदला है. बोर्ड के देखने में आया कि Facebook ने उस कंटेंट को पहले ही रीस्टोर कर दिया था.

पॉलिसी से जुड़े सुझाव के कथन में बोर्ड ने कहा कि Facebook:

  • भूलवश गायब हुए 2017 के उस दिशा निर्देश को लागू करने योग्य आंतरिक मानकों और उससे जुड़े ज्ञात सवालों में तुरंत शामिल करे (कंटेंट मॉडरेटर के लिए आंतरिक दिशा निर्देश).
  • खतरनाक लोग और संगठन से जुड़ी पॉलिसी को लागू करने के लिए ऑटोमेटेड मॉडरेशन की प्रक्रिया का मूल्यांकन करे. जहाँ आवश्यक हो, वहाँ Facebook को 2017 के दिशा निर्देश को लागू करने में विफल होने के कारण होने वाली प्रवर्तन से जुड़ी पिछली गलतियों से ट्रेनिंग डेटा को अलग करने के लिए क्लासिफ़ायर को अपडेट करना चाहिए.
  • कहीं कोई अन्य पॉलिसी तो गायब नहीं हुई, यह पता लगाने के लिए जारी रिव्यू प्रक्रिया के परिणाम प्रकाशित करे, जिसमें सभी गायब पॉलिसियों के विवरण के साथ वे किस अवधि में गायब रहीं और उन्हें फिर से शामिल करने के लिए जो कदम उठाए गए, उनका विवरण शामिल हो.
  • सुनिश्चित करे कि खतरनाक लोग और संगठन से जुड़ी “पॉलिसी बनाने के कारण” में यह बात दर्शाई गई हो कि मानवाधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ध्यान रखे जाने से “सुरक्षा” के मूल्य को बढ़ावा मिलता है. पॉलिसी बनाने के कारण में “असलियत में होने वाले उन नुकसानों” को पूरी जानकारी देकर स्पष्ट रूप से समझाना चाहिए, जिनसे बचाने की कोशिश यह पॉलिसी करती है और जब किसी की “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” छीनी जाती है, तो यह उस कोशिश को नाकाम करती है.
  • पॉलिसी में साफ़ तौर पर समझाए कि किस तरह के “समर्थन” शामिल नहीं हैं. यूज़र्स को खतरनाक घोषित संगठनों के सदस्यों के मानवाधिकारों के कथित हनन पर चर्चा करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए.
  • कम्युनिटी स्टैंडर्ड में समझाए कि यूज़र्स, Facebook को अपनी पोस्ट से जुड़ा इरादा स्पष्ट कैसे कर सकते हैं.
  • Facebook के प्रोडक्ट पॉलिसी फ़ोरम के ज़रिए खतरनाक लोग और संगठन से जुड़ी अपनी पॉलिसी में प्रस्तावित बदलावों में स्टेकहोल्डर की सार्थक सहभागिता सुनिश्चित करे, जिसमें लोगों का नज़रिया जानने की अपील सार्वजनिक रूप से करे.
  • पॉलिसी से जुड़े किसी भी प्रस्तावित बदलाव के बारे में कंटेंट मॉडरेटर को आतंरिक दिशा निर्देश और प्रशिक्षण देना सुनिश्चित करे.
  • सुनिश्चित करे कि यूज़र्स को उनका कंटेंट हटाए जाने पर उसकी जानकारी दी जाए. नोटिफ़िकेशन में यह बताया जाना चाहिए कि उस कंटेंट को किसी सरकारी अनुरोध के चलते या फिर किसी कम्युनिटी स्टैंडर्ड का उल्लंघन करने पर हटाया गया अथवा किसी राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होने के सरकारी दावे के चलते हटाया गया (साथ ही किसी कंटेंट को हटाने का अधिकार-क्षेत्र भी बताया जाना चाहिए).
  • Instagram के यूज़र्स को स्पष्ट करे कि Facebook के कम्युनिटी स्टैंडर्ड Instagram पर भी उसी तरह लागू होते हैं, जिस तरह Facebook पर लागू होते हैं.
  • अपनी ट्रांसपेरेंसी रिपोर्टिंग में कम्युनिटी स्टैंडर्ड से जुड़े उल्लंघनों (राष्ट्रीय कानून के उल्लंघनों से तुलना करते हुए) के आधार पर सरकारों की ओर से आए कंटेंट हटाने के अनुरोधों की संख्या के बारे में जानकारी शामिल करे, जिसमें उन अनुरोधों के परिणामों की जानकारी हो.
  • अपनी ट्रांसपेरेंसी रिपोर्टिंग में खतरनाक लोग और संगठन का “गुणगान” और “समर्थन” करने पर नियमों के तहत प्रवर्तन करने के से जुड़ी एरर रेट के बारे में पूरी-पूरी जानकारी शामिल करें, जो क्षेत्र और भाषा के अनुसार बँटी हुई हो.

केस का पूरा फ़ैसला

1. फ़ैसले का सारांश

ओवरसाइट बोर्ड ने Facebook के उस मूल फ़ैसले को बदल दिया है, जिसके तहत Facebook द्वारा खतरनाक व्यक्ति के रूप में घोषित अब्दुल्ला ओजलान के एकांत कारावास पर बहस करने के लिए लोगों को बढ़ावा देने वाली एक Instagram पोस्ट को निकाल दिया गया था. संबंधित यूज़र की अपील पर बोर्ड द्वारा इस केस को रिव्यू के लिए चुने जाने के बाद Facebook ने यह निष्कर्ष निकाला कि उस कंटेंट को गलती से हटाया गया था और उस पोस्ट को Instagram पर रीस्टोर कर दिया.

Facebook ने सफ़ाई देते हुए कहा कि 2018 में उनसे आंतरिक पॉलिसी के उस हिस्से को नए रिव्यू सिस्टम में “ट्रांसफ़र नहीं कर पाने की गलती अनजाने में हो गई”, जिसके तहत यूज़र्स को खतरनाक घोषित किए गए किसी व्यक्ति के एकांत कारावास के हालातों पर चर्चा कर सकते हैं. बोर्ड का मानना है कि अगर Facebook अपनी पॉलिसी को लेकर और पारदर्शिता रखता, तो इस गलती से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता था या पूरी तरह से टाला जा सकता था. यहाँ तक कि भूलवश शामिल नहीं किए गए आतंरिक पॉलिसी दिशा निर्देशों के बिना भी बोर्ड ने यह पाया कि उस कंटेंट को कभी-भी नहीं हटाया जाना चाहिए था. यह बस एकांत कारावास में ओजलान की हिरासत की आवश्यकता पर बहस करने की एक अपील थी और इसे हटाने से खतरनाक व्यक्तियों और संगठनों की पॉलिसी का “असलियत में होने वाले नुकसान से बचाने और उसे रोकने” का उद्देश्य पूरा नहीं हुआ. इसके बजाय उस कंटेंट को हटाने से मानवाधिकारों से जुड़े मामले के बारे में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगा दी गई.

2. केस का विवरण

यह केस कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (PKK) के संस्थापक सदस्य अब्दुल्ला ओजलान से संबंधित कंटेंट से जुड़ा हुआ है. PKK की स्थापना 1970 के दशक में दक्षिणी-पूर्वी तुर्की, सीरिया और इराक में स्वतंत्र कुर्द राज्य बनाने के लक्ष्य के साथ की गई थी. यह समूह अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए हिंसा का उपयोग करता है. PKK को अमेरिका, यूरोपीय संघ, यूके और तुर्की व अन्य देशों ने आतंकवादी संगठन माना गया है. तुर्की क्षेत्र के एक हिस्से को उससे अलग करने के उद्देश्य से हिंसक घटनाओं को अंजाम दे रहे ओजलान को 1999 में गिरफ़्तार किए जाने और सजा सुनाए जाने के बाद से तुर्की के इमराली आइलैंड में बंदी बनाकर रखा गया है ( ओजलान बनाम तुर्की का केस, मानवाधिकार की यूरोपीय अदालत).

25 जनवरी 2021 को अमेरिका के एक Instagram यूज़र ने ओजलान की फ़ोटो पोस्ट की, जिसमें अंग्रेज़ी में लिखा था "y'all ready for this conversation" (“आप सब इस बारे में बात करने के लिए तैयार हैं”). फ़ोटो के नीचे उस यूज़र ने लिखा कि इमराली आइलैंड की जेल में कैद ओजलान का एकांतवास खत्म करने के लिए आवाज़ उठाने का समय आ गया है. उस यूज़र ने पाठकों को ओजलान के कारावास और अमानवीय तरीके के एकांत कारावास के खिलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया, जिसमें भूख हड़ताल, प्रदर्शन, कानूनी कार्रवाई, विचारों और लेखों, पाठक समूहों और मीम के ज़रिए अपनी आवाज़ उठाने की बात शामिल थी. उस कंटेंट में ओजलान की रिहाई की अपील नहीं की गई थी, न ही PKK का उल्लेख या हिंसा का समर्थन किया गया था.

उस पोस्ट को Facebook ने ऑटोमेटिक रूप से फ़्लैग किया था, और फिर एक मॉडरेटर द्वारा मूल्यांकन किए जाने के बाद, खतरनाक व्यक्तियों और संगठनों से जुड़ी पॉलिसी का उल्लंघन करने के लिए 12 फ़रवरी को हटा दिया गया था. संबंधित यूज़र ने Facebook से इस फ़ैसले को लेकर अपील की, तो उन्हें बताया गया कि यह फ़ैसला अंतिम है और COVID-19 के कारण Facebook के रिव्यू करने की क्षमता में आई अस्थायी कमी के चलते उनकी अपील का रिव्यू नहीं किया जा सकेगा. हालाँकि, एक और मॉडरेटर ने फिर भी उस कंटेंट का रिव्यू किया और उन्हें भी उसमें खतरनाक लोग और संगठन से जुड़ी पॉलिसी का उल्लंघन नज़र आया. यूज़र को नोटिफ़िकेशन मिला, जिसमें बताया गया कि दूसरे रिव्यू में शुरुआती फ़ैसले को सही ठहराया गया है. फिर संबंधित यूज़र ने ओवरसाइट बोर्ड के सामने अपील पेश की.

बोर्ड ने इस केस को रिव्यू के लिए चुना और इसे एक पैनल को असाइन किया. बोर्ड के समक्ष पेश करने के लिए अपने फ़ैसले से जुड़ा तर्क तैयार करते समय Facebook को खतरनाक लोग और संगठन से जुड़ी पॉलिसी के आतंरिक दिशा निर्देश का एक ऐसा हिस्सा मिला, जिसके तहत खतरनाक माने गए लोगों के एकांत कारावास के हालातों के बारे में चर्चा या बहस की जा सकती है. यह दिशा निर्देश 2017 में ओजलान के कारावास के हालातों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैदा हुई समस्या से निपटने के लिए आंशिक रूप से तैयार किया गया था. Facebook ने सफ़ाई देते हुए कहा कि 2018 में इस दिशा निर्देश को नए रिव्यू सिस्टम में “भूलवश ट्रांसफ़र नहीं” किया गया था. साथ ही यह दिशा निर्देश Facebook की पॉलिसी टीम में भी शेयर नहीं किया गया था, जो इन बातों को लेकर नियम बनाती है कि इस प्लेटफ़ॉर्म पर किन चीज़ों की परमिशन है. हालाँकि इस दिशा निर्देश को कंटेंट मॉडरेटर प्रशिक्षण के अनुलग्नक से तकनीकी रूप से एक्सेस कर सकते हैं, कंपनी मानती है कि स्टैंडर्ड रिव्यू प्रक्रियाओं के दौरान इसे खोजना मुश्किल था और इस केस में रिव्यूअर के पास इसकी एक्सेस नहीं थी. यह दिशानिर्देश पूरी तरह से एक आंतरिक दस्तावेज़ है, जिसे Facebook के मॉडरेटर की मदद के लिए तैयार किया गया है और यह सार्वजनिक रूप से नज़र आने वाले Facebook के कम्युनिटी स्टैंडर्ड या Instagram की कम्युनिटी गाइडलाइन में नज़र नहीं आता था.

Facebook को केवल उस यूज़र की वजह से लागू नहीं की जा रही इस पॉलिसी के बारे में पता चला, जिसने अपना कंटेंट हटाए जाने के Facebook के फ़ैसले के खिलाफ़ बोर्ड के सामने अपील पेश करने का फ़ैसला लिया. अगर वह यूज़र ये एक्शन नहीं लेता, तो शायद यह गलती कभी सामने ही नहीं आ पाती. 29 जून तक Facebook ने कंटेंट मॉडरेटर के लिए दिशानिर्देश में भूलवश गायब हुई आंतरिक पॉलिसी को फिर से शामिल नहीं किया था. कंपनी ने बोर्ड को यह सफ़ाई दी कि वह “यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेगी कि उनके द्वारा इस विषय पर उनके कंटेंट रिव्यूअर को जो दिशानिर्देश दिए जाएँ, वे स्पष्ट और आसानी से उपलब्ध हों, ताकि भविष्य में एन्फ़ोर्समेंट से जुड़ी गलती से बचने में मदद मिल सके.”

Facebook ने 23 अप्रैल को उस कंटेंट को Instagram पर रीस्टोर करके बोर्ड को यह बताया कि वे “फ़िलहाल उनकी पॉलिसी को यह स्पष्ट करने के लिए अपडेट कर रहे हैं कि यूज़र्स, आतंकवादी ठहराए गए किसी व्यक्ति के एकांत कारावास के हालातों या उनके मानवाधिकारों से जुड़े अन्य उल्लंघनों पर बहस या चर्चा कर सकते हैं, हालाँकि उनके हिंसक कार्यों का गुणगान या समर्थन करने वाले कंटेंट पर अभी भी रोक लगी हुई है.” कंपनी ने “ओवरसाइट बोर्ड से मानवाधिकार से जुड़ी समस्याओं में अभिव्यक्ति को बढ़ावा देने और यह सुनिश्चित करने कि आतंकवादियों या हिंसक लोगों के गुणगान या समर्थन करने वाला कंटेंट फैलाने में उनके प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग न हो, इन दोनों के बीच सही संतुलन बनाए रखने के तरीके को लेकर इनसाइट और मार्गदर्शन माँगा है.”

3. प्राधिकार और दायरा

बोर्ड को उस यूज़र के अपील करने के बाद Facebook के फ़ैसले का रिव्यू करने का अधिकार है, जिसकी पोस्ट हटा दी गई थी (चार्टर अनुच्छेद 2, सेक्शन 1; उपनियम अनुच्छेद 2, सेक्शन 2.1). बोर्ड उस फ़ैसले को कायम रख सकता है या उसे बदल सकता है (चार्टर अनुच्छेद 3, सेक्शन 5). केस के फ़ैसले 2020-004-IG-UA के अनुसार Facebook द्वारा किसी ऐसे केस का फ़ैसला बदल देने से, जिसके खिलाफ़ संबंधित यूज़र ने अपील की है, वह केस रिव्यू से बाहर नहीं हो जाता है.

बोर्ड के फ़ैसले बाध्यकारी होते हैं और उनमें पॉलिसी से जुड़ी सलाह के कथनों के साथ सुझाव भी शामिल हो सकते हैं. ये सुझाव बाध्यकारी नहीं होते हैं, लेकिन Facebook को उनका जवाब देना होगा (चार्टर अनुच्छेद 3, सेक्शन 4).

पारदर्शी और नैतिक तरीके से विवादों को सुलझाने के लिए यह बोर्ड एक स्वतंत्र शिकायत निवारण प्रणाली है.

4. प्रासंगिक स्टैंडर्ड

ओवरसाइट बोर्ड ने इन स्टैंडर्ड पर विचार करते हुए अपना फ़ैसला दिया है:

I. Facebook की कंटेंट पॉलिसी:

Instagram की कम्युनिटी गाइडलाइन में यह बताया गया है कि Instagram, आतंकवाद, संगठित अपराध या नफ़रत फैलाने वाले समूहों का समर्थन या उनकी प्रशंसा करने की जगह नहीं है. गाइडलाइन के इस सेक्शन में खतरनाक लोग और संगठनों से जुड़े Facebook के कम्युनिटी स्टैंडर्ड का लिंक होता है (कम्युनिटी स्टैंडर्ड में 23 जून को किए गए अपडेट को दर्शाने वाला बदलाव से जुड़ा रिकॉर्ड यहाँ है). बोर्ड द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब में Facebook ने यह कन्फ़र्म किया कि ये कम्युनिटी स्टैंडर्ड जिस तरह से Instagram पर लागू होते हैं, ठीक वैसे ही Facebook पर भी लागू होते हैं.

खतरनाक लोग और संगठन से जुड़े कम्युनिटी स्टैंडर्ड में कहा गया है कि "असलियत में होने वाले नुकसान को रोकने और नाकाम करने की कोशिश में हम ऐसे किसी भी संगठन या व्यक्ति को Facebook पर मौजूद रहने की परमिशन नहीं देते हैं जो किसी हिंसक मिशन की घोषणा करता है या हिंसा में शामिल होता है." इस स्टैंडर्ड में आगे कहा है, जिस समय इसे लागू किया गया था, कि Facebook "इन गतिविधियों में शामिल समूहों, लीडर या लोगों का समर्थन करने वाले या इनका गुणगान करने वाले कंटेंट को भी हटा देता है."

II. Facebook के मूल्य:

Facebook के मूल्यों की रूपरेखा कम्युनिटी स्टैंडर्ड के परिचय सेक्शन में बताई गई है.

“अभिव्यक्ति” के महत्व को “सर्वोपरि” बताया गया है:

हमारे कम्युनिटी स्टैंडर्ड का लक्ष्य हमेशा एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म बनाना रहा है, जहाँ लोग अपनी बात रख सकें और अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकें. […] हम चाहते हैं कि लोग अपने लिए महत्व रखने वाले मुद्दों पर खुलकर बातें कर सकें, भले ही कुछ लोग उन बातों पर असहमति जताएँ या उन्हें वे बातें आपत्तिजनक लगें.

Facebook “अभिव्यक्ति” को चार मूल्यों के मामले में सीमित करता है, जिनमें से एक यहाँ प्रासंगिक है:

“सुरक्षा”: हम Facebook को एक सुरक्षित जगह बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. धमकी भरी अभिव्यक्ति से लोगों में डर, अलगाव की भावना आ सकती या दूसरों की आवाज़ दब सकती है और Facebook पर इसकी परमिशन नहीं है.

III. मानवाधिकार के स्टैंडर्ड:

बिज़नेस और मानव अधिकारों के बारे में संयुक्त राष्ट्र संघ के मार्गदर्शक सिद्धांत (UNGP), जिन्हें 2011 में संयुक्त राष्ट्र संघ की मानव अधिकार समिति का समर्थन मिला है, वे प्राइवेट बिज़नेस की मानवाधिकारों से जुड़ी ज़िम्मेदारियों का स्वैच्छिक ढांचा तैयार करते हैं. मार्च 2021 में Facebook नेमानवाधिकारों से जुड़ी अपनी कॉर्पोरेट पॉलिसी की घोषणा की, जिसमें उन्होंने UNGP के अनुसार मानवाधिकारों का ध्यान रखने की अपनी प्रतिज्ञा को दोहराया. इस केस में बोर्ड ने इन मानवाधिकार स्टैंडर्ड को ध्यान में रखते हुए विश्लेषण किया:

  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: अनुच्छेद 19, नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिज्ञापत्र ( ICCPR); अनुच्छेद 6, मानवाधिकारों के रक्षकों से जुड़ी घोषणा, A/RES/53/144 (1998); मानवाधिकार समिति, सामान्य टिप्पणी संख्या 34 (2011); विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर विशेष रैपर्टर, A/HRC/38/35 (2018), A/74/486 (2019); मानवाधिकारों और आतंकवाद के विरोध पर विशेष रैपर्टर, A/HRC/40/52 (2019)
  • समाधान का अधिकार: अनुच्छेद 2, ICCPR; मानवाधिकार समिति, सामान्य टिप्पणी संख्या 31 (2004)
  • यातना, क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार या दंड पर प्रतिबंध: नियम 43, कैदियों के साथ किए जाने वाले व्यवहार से जुड़े संयुक्त राष्ट्र के मानक न्यूनतम नियम (नेल्सन मंडेला नियम) A/Res/70/175 (2016).

5. यूज़र का कथन

बोर्ड को की गई अपनी अपील में यूज़र ने बताया कि उन्होंने ओजलान की सोच के बारे में बात करने और उनके एकांतवास को खत्म करने से जुड़ी चर्चा को बढ़ावा देने के लिए वह कंटेंट पोस्ट किया था. उस यूज़र ने कहा कि उनका मानना है ओजलान और उनकी सोच के बारे में बातचीत करने पर रोक लगा देने से वे चर्चाएँ भी बंद हो जाती हैं, जिनसे कि मध्यपूर्व में कुर्द लोगों की समस्याओं का शांतिपूर्ण तरीके से समाधान किया जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि वे हिंसा को बढ़ावा देना नहीं चाहते थे, लेकिन उनका यह मानना है कि Instagram पर ओजलान की फ़ोटो पोस्ट करने पर बैन नहीं होना चाहिए. यूज़र ने दावा किया कि ओजलान के चेहरे को हिंसक संगठनों से जोड़कर बताना तथ्यों पर आधारित नहीं है, बल्कि यह बदनाम करने की साजिश है और एक महत्वपूर्ण बातचीत को दबाने के लिए जारी एक कोशिश है. उन्होंने यह बताते हुए ओजलान के कारावास की तुलना दक्षिण अफ़्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला के कारावास से की कि ओजलान के कारावास को दुनिया की नज़र में लाने में अंतरराष्ट्रीय कम्युनिटी की भूमिका ठीक वैसी ही है, जो मंडेला के समय थी.

6. Facebook के फ़ैसले का स्पष्टीकरण

Facebook ने शुरुआती तौर पर यह निष्कर्ष निकाला कि वह कंटेंट ओजलान और PKK का समर्थन करने की एक अपील थी, जिससे खतरनाक लोग और संगठन से जुड़ी पॉलिसी का उल्लंघन हुआ. ओजलान PKK के संस्थापक सदस्य हैं, जिसका नाम Facebook के रिकॉर्ड में अमेरिका द्वारा घोषित विदेशी आतंकी संगठन के रूप में दर्ज है. संगठन की इस पहचान के आधार पर ही Facebook ने ओजलान का नाम खतरनाक लोगों से जुड़ी अपनी लिस्ट में शामिल किया है. खतरनाक लोग और संगठन से जुड़ी अपनी पॉलिसी के तहत Facebook ऐसे किसी भी कंटेंट को हटा देता है, जिसे वह ऐसे व्यक्तियों का समर्थन करने वाला मानता है.

बोर्ड द्वारा इस केस को रिव्यू के लिए चुने जाने के बाद, Facebook ने अपनी पॉलिसी के अनुसार उस कंटेंट का एक बार फिर मूल्यांकन किया और पाया कि उन्होंने इसी मामले को लेकर 2017 में आंतरिक दिशानिर्देश तैयार किया था. परिस्थिति को समझाते हुए Facebook ने कहा कि 2018 में नए रिव्यू सिस्टम में स्विच करते समय वे भूलवश इस दिशानिर्देश को ट्रांसफ़र नहीं कर पाए थे और न ही अपनी पॉलिसी टीम के साथ इसे शेयर कर पाए थे.

इस दिशानिर्देश के तहत ऐसा कंटेंट पोस्ट करने की परमिशन है, जिसमें पोस्ट करने वाला व्यक्ति किसी आतंकवादी की स्वतंत्रता की अपील कर रहा हो, जिसमें कंटेंट का संदर्भ इस तरह शेयर किया गया हो, जो शांति का समर्थन करता हो या उस आतंकवादी की कैद पर बहस करता हो. उस दिशानिर्देश को लागू करने पर Facebook के देखने में आया कि इस केस के कंटेंट पर यह दिशा निर्देश पूरी तरह से लागू होता है और उन्होंने उस कंटेंट को रीस्टोर कर दिया.

7. थर्ड पार्टी सबमिशन

बोर्ड को इस केस के संबंध में 12 सार्वजनिक टिप्पणियाँ मिलीं. इनमें से छह टिप्पणियाँ अमेरिका और कनाडा, चार यूरोप, वहीं दो मध्यपूर्व और उत्तरी अफ़्रीका से मिलीं.

सबमिट की गई टिप्पणियों में खतरनाक लोगों और संगठनों से जुड़ी पॉलिसी में पारदर्शिता की कमी के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों के साथ इसकी असंगतता का विषय उठाया गया, साथ ही इस विषय पर भी बात की गई कि यह कंटेंट एकांत कारावास के खिलाफ़ आवाज़ उठाने की अपील करता है, न कि किसी का गुणगान या समर्थन करता है.

इस केस के संबंध में सबमिट की गई सार्वजनिक टिप्पणियाँ देखने के लिए कृपया यहाँ क्लिक करें.

8. ओवरसाइट बोर्ड का विश्लेषण

8.1 Facebook की कंटेंट पॉलिसी का अनुपालन

बोर्ड ने पाया कि उस कंटेंट को निकालने का Facebook का फ़ैसला कंपनी के कम्युनिटी स्टैंडर्ड के अनुसार नहीं था. खतरनाक व्यक्तियों और संगठनों से जुड़े कम्युनिटी स्टैंडर्ड में यह परिभाषित नहीं किया गया था कि खतरनाक ठहराए गए किसी व्यक्ति या संगठन के “समर्थन” में कौन-कौन सी बातें आती हैं, जब तक कि इसे 23 जून 2021 को अपडेट नहीं किया गया.

जनवरी 2021 में बोर्ड ने सुझाव दिया कि Facebook सार्वजनिक रूप से गुणगान, समर्थन और प्रतिनिधित्व करने को परिभाषित करने के साथ-साथ इस बारे में और भी स्पष्ट रूप से बताने वाले उदाहरण शामिल करे कि यह पॉलिसी कैसे लागू होती है ( केस 2020-005-FB-UA). फरवरी में Facebook ने “खतरनाक लोग और संगठन से जुड़े अपने कम्युनिटी स्टैंडर्ड में कुछ ही हफ़्तों में यह बात जोड़ने का वादा किया जिसमें यह बताया गया हो कि हम अस्पष्ट उद्देश्य वाला कंटेंट हटा सकते हैं, [साथ ही साथ] कुछ ही महीनों में “गुणगान,” “समर्थन” और “प्रतिनिधित्व” की परिभाषाएँ शामिल करने का भी वादा किया था.” 23 जून 2021 को Facebook ने परिभाषाएँ शामिल करने के लिए इस स्टैंडर्ड को अपडेट किया. बोर्ड ने यह भी सुझाव दिया कि Facebook स्पष्ट रूप से Instagram की कम्युनिटी गाइडलाइन और Facebook कम्युनिटी स्टैंडर्ड के बीच संबंध के बारे में समझाए ( केस 2020-004-IG-UA). 29 जून तक Facebook ने अपने इस वादे को पूरा करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों के बारे में बोर्ड को नहीं बताया था.

मौजूदा केस में बोर्ड के अनुरोध पर Facebook ने कंटेंट मॉडरेटर्स के लिए खतरनाक ठहराए गए लोग और संगठन के “समर्थन” के अर्थ के बारे में आंतरिक दिशानिर्देश शेयर किया. जो “समर्थन में एक्शन लेने की अपील” को ऐसी अपील की रूप में परिभाषित करता है, जिसमें ऑडियंस से सीधे तौर पर खतरनाक ठहराए गए किसी संगठन को आगे बढ़ाने या उसके उद्देश्य को लेकर कोई काम करने को कहा गया हो. इस कंटेंट को पोस्ट करते समय यह बात सार्वजनिक रूप से नज़र आने वाले कम्युनिटी स्टैंडर्ड में दिखाई नहीं देती थी और इसे 23 जून 2021 को प्रकाशित किए गए अपडेट में शामिल नहीं किया गया था.

इसके अलावा ओजलान के एकांत कारावास के चलते उठी समस्याओं से निपटने के लिए 2017 में तैयार किया गया आंतरिक दिशानिर्देश, जो कि भूलवश गायब हो गया था, से यह स्पष्ट होता है कि खतरनाक ठहराए गए किसी व्यक्ति के कारावास के हालातों पर चर्चाएँ की जा सकती हैं, और ऐसी चर्चा इस तरह के व्यक्ति या संगठन के लिए समर्थन नहीं होती है. किसी अन्य संदर्भ के अभाव में, Facebook किसी आतंकवादी की आज़ादी की माँग करने वाले बयानों को उनके समर्थन के रूप में देखता है और ऐसा कंटेंट हटा दिया जाता है. एक बार फिर बता दें कि यह भाषा सभी को दिखाई देने वाले कम्युनिटी स्टैंडर्ड में नज़र नहीं आती है.

बोर्ड को इस बात की चिंता है कि पॉलिसी से जुड़े एक महत्वपूर्ण अपवाद के संबंध में मॉडरेटर के लिए विशिष्ट दिशानिर्देश तीन सालों तक गायब थे. इस दिशानिर्देश से यह स्पष्ट हो जाता है कि इस केस से जुड़े कंटेंट से उल्लंघन नहीं हुआ था. अगर बोर्ड ने इस केस को रिव्यू के लिए नहीं चुना होता, तो कंटेंट मॉडरेटर के लिए यह दिशानिर्देश अज्ञात रहते और जनहित से जुड़ी बहुत सारी अभिव्यक्ति को हटा दिया जाता.

यह केस दर्शाता है कि यूज़र्स के लिए सार्वजनिक नियम क्यों महत्वपूर्ण होते हैं: इनसे उन्हें न केवल अपेक्षित व्यवहार की सूचना मिलती है, बल्कि ये उन्हें Facebook की गलतियाँ दिखाने में भी सक्षम बनाते हैं. बोर्ड समझता है कि Facebook अपने आंतरिक कंटेंट मॉडरेशन नियमों को पूरी तरह से प्रकट करने से इसलिए हिचकता है क्योंकि उसे चिंता है कि कुछ यूज़र्स नुकसानदेह कंटेंट फैलाने के लिए इसका फ़ायदा उठा सकते हैं. हालाँकि, ऐसा कंटेंट जिसमें खतरनाक घोषित व्यक्तियों के लिए “समर्थन” नज़र आता है, उसे डिफ़ॉल्ट रूप से हटाने की Facebook की पॉलिसी और वहीं इसके मुख्य अपवादों को लोगों से छिपाए रखने से यह गलती किसी भी जवाबदेही के बिना लगभग तीन सालों तक कंपनी की नज़र में नहीं आई. जून 2021 में खतरनाक लोगों और संगठनों से जुड़े कम्युनिटी स्टैंडर्ड में किए गए अपडेट से इस बारे में और जानकारी मिलती है कि Facebook किस चीज़ को "समर्थन" मानता है, लेकिन इसमें यूज़र्स को यह नहीं बताया गया कि इन नियमों में कौन-से अपवाद लागू किए जा सकते हैं.

यहाँ तक कि भूलवश गायब हुए दिशानिर्देश को खोजे बिना भी उस कंटेंट को “समर्थन” के कारण नहीं हटाया जाना चाहिए था. इस तरह की अपील को PKK के खतरनाक इरादों का समर्थन करने के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. उस यूज़र ने लोगों को केवल ओजलान के एकांत कारावास के बारे में चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित किया, जिसमें भूख हड़ताल, प्रदर्शन, कानूनी कार्रवाई, विचारों और लेखों, पाठक समूहों और मीम के ज़रिए अपनी बात रखना शामिल था. इस कारण से, इस केस में कंटेंट को हटाने से पॉलिसी का वह लक्ष्य पूरा नहीं हुआ, जिसके उद्देश्य असलियत में लोगों को होने वाले नुकसान को रोकना और नुकसान को कम करना है.

8.2 Facebook के मूल्यों का अनुपालन

बोर्ड ने पाया कि इस कंटेंट को हटाने से जुड़ा Facebook का फ़ैसला “अभिव्यक्ति” और “सुरक्षा” से जुड़े Facebook के मूल्यों के अनुसार नहीं लिया गया था.

उस यूज़र ने इमराली आइलैंड की जेल में कैद ओजलान का एकांतवास खत्म करने के लिए आवाज़ उठाने की अपील करने वाली अपनी पोस्ट ध्यानपूर्वक बनाई थी. उसने पाठकों को प्रोत्साहित किया कि वे अमानवीय तरीके के एकांत कारावास और ओजलान को इस तरह से कैद में रखना क्यों ज़रूरी है, इसके कारणों पर चर्चा करें. उस यूज़र ने यह चर्चा छेड़ने के लिए शांतिपूर्ण कार्रवाई का समर्थन किया और अपनी पोस्ट में हिंसा का समर्थन या हिंसा उकसाने का काम नहीं किया. उसने ओजलान की विचारधारा और PKK के लिए समर्थन भी व्यक्त नहीं किया था.

बोर्ड ने पाया कि ऐसी अभिव्यक्ति जो मानवाधिकारों के उल्लंघन को चुनौती देती हो, "अभिव्यक्ति" के मूल्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है. यह बात हिरासत में लिए गए लोगों के अधिकारों के संदर्भ में ख़ास तौर पर और महत्वपूर्ण होती है, जो अपने अधिकारों के समर्थन में प्रभावी ढंग से वकालत करने में असमर्थ हो सकते हैं, ख़ास तौर पर उन देशों में जहाँ कैदियों के साथ कथित दुर्व्यवहार होता है और जहाँ मानवाधिकारों की वकालत को दबाया जा सकता है.

"सुरक्षा" का मूल्य सैद्धांतिक तौर पर जुड़ा हुआ था क्योंकि कंटेंट किसी खतरनाक घोषित व्यक्ति से संबंधित था. हालाँकि, कंटेंट हटा देने से "सुरक्षा" संबंधी किसी स्पष्ट चिंता का समाधान नहीं हुआ. कंटेंट में ऐसी भाषा शामिल नहीं थी, जो किसी को हिंसा करने के लिए उकसाती हो या हिंसा का समर्थन करती हो. इसमें "अन्य यूज़र्स को धमकाने, अलग करने या उनको चुप करने" की संभावना नहीं थी. बल्कि Facebook के फ़ैसले ने मानवाधिकारों से जुड़ी चिंता व्यक्त करने वाले व्यक्ति की आवाज़ को गलत तरीके से दबा दिया.

8.3 Facebook के मानवाधिकार ज़िम्मेदारियों का अनुपालन

कंपनी की कॉर्पोरेट मानवाधिकार पॉलिसी में बताए अनुसार, इस कंटेंट को हटाना उसकी मानवाधिकारों का सम्मान करने की प्रतिबद्धता के अनुरूप नहीं था. आतंकवादियों से जुड़े कंटेंट के संबंध में, Facebook क्राइस्टचर्च कॉल का हस्ताक्षरकर्ता है, जिसका उद्देश्य "आतंकवादियों और हिंसक चरमपंथियों से जुड़े कंटेंट" के ऑनलाइन प्रसार को "समाप्त" करना है. बोर्ड, क्राइस्टचर्च कॉल के संबंध में नागरिक समाज द्वारा व्यक्त की गईं मानवाधिकारों की चिंताओं से अवगत है, लेकिन फिर भी वह चाहता है कि सोशल मीडिया कंपनियाँ अपने कम्युनिटी स्टैंडर्ड को "मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता के अनुरूप" लागू करें.

I. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19 ICCPR)

अनुच्छेद 19 में कहा गया है कि हर व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है, जिसमें जानकारी माँगने, प्राप्त करने और प्रदान करने की स्वतंत्रता शामिल है. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार में मानवाधिकारों की चर्चा शामिल है (सामान्य कमेंट 34, पैरा. 11) और यह "पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों की समझ के लिए आवश्यक शर्त" है (सामान्य कमेंट 34, पैरा. 3). इसके अलावा, मानवाधिकार रक्षकों के संबंध में संयुक्त राष्ट्र की घोषणा कहती है कि सभी को "उन मामलों की ओर लोगों का ध्यान खींचने के लिए सभी मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं का, कानूनी और व्यावहारिक दोनों तौर पर और इन तथा अन्य उचित माध्यमों के ज़रिए उनका पालन करने के संबंध में अध्ययन करने, चर्चा करने, राय बनाने या रखने का अधिकार है" (A/RES/53/144, अनुच्छेद 6(c)).

यूज़र ने एक व्यक्ति के एकान्त और लंबे समय तक कारावास के बारे में चिंताओं को उजागर करने की कोशिश की थी. बोर्ड ने नोट किया कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इस तरह की व्यवहारों के बारे में मानवाधिकारों की चिंताओं को व्यक्त किया है. नेल्सन मंडेला नियमों में निर्दिष्ट किया गया है कि राज्यों को अनिश्चितकालीन और साथ ही लंबे समय तक एकान्त कारावास को यातना या दंड के क्रूर, अमानवीय, अपमानजनक बर्ताव के रूप में प्रतिबंधित करना चाहिए ( A/Res/70/175, नियम 43). किसी भी व्यक्ति की हिरासत की स्थितियों पर चर्चा करना और हिरासत में उनके मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन, ICCPR के अनुच्छेद 19 द्वारा संरक्षित अभिव्यक्ति के प्रकारों के अंतर्गत आते हैं, जैसा कि सुरक्षा के लिए मानवाधिकार रक्षकों के संबंध में संयुक्त राष्ट्र की घोषणा में ज़ोर दिया गया है.

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार बुनियादी है, लेकिन यह संपूर्ण नहीं है. इसे प्रतिबंधित किया जा सकता है, लेकिन प्रतिबंधों के लिए वैधानिकता, वैधानिक लक्ष्य और आवश्यकता तथा समानता की शर्तों को पूरा करना ज़रूरी है (अनुच्छेद 19, पैरा. 3, ICCPR). मानवाधिकार समिति ने कहा है कि अभिव्यक्ति से संबंधित प्रतिबंधों से "अधिकार ही खतरे में नहीं पड़ना चाहिए" और इस बात पर ज़ोर दिया है कि "अधिकार और प्रतिबंध के बीच तथा आदर्श और अपवाद के बीच संबंध को बदला नहीं जाना चाहिए" (सामान्य कमेंट संख्या 34, पैरा. 21). अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष रैपर्टर ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि सोशल मीडिया कंपनियों को खतरनाक लोगों और संगठनों से संबंधित अपनी कंटेंट मॉडरेशन पॉलिसी को इन सिद्धांतों के अनुरूप बनाने की कोशिश करनी चाहिए (A/74/486, पैरा. 58(b)).

a.वैधानिकता (नियमों की स्पष्टता और सुलभता)

अभिव्यक्ति से संबंधित प्रतिबंध पर्याप्त सटीकता के साथ तैयार किए जाने चाहिए ताकि लोग समझ सकें कि क्या निषिद्ध है और उसके अनुसार ही व्यवहार करें (सामान्य कमेंट 34, पैरा. 25). ऐसे नियमों को लोगों के लिए सुलभ भी बनाया जाना चाहिए. सटीक नियम उनके लिए महत्वपूर्ण हैं जो उन्हें लागू कर रहे हैं: विवेक को बाधित करने और मनमाने फ़ैसले लेने पर रोक लगाने के लिए, और पूर्वाग्रह से बचाव के लिए भी.

बोर्ड ने केस 2020-005-FB-UA में यह सुझाव दिया था कि "प्रतिनिधित्व," "गुणगान" और "समर्थन" को परिभाषित करने के लिए खतरनाक लोगों और संगठनों से जुड़े कम्युनिटी स्टैंडर्ड को संशोधित किया जाए और केस 2021-003-FB-UA में इन चिंताओं को दोहराया. बोर्ड ने नोट किया कि Facebook ने अब सार्वजनिक रूप से उन शर्तों को परिभाषित किया है. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष रैपर्टर ने "गुणगान" और "समर्थन" दोनों से संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म प्रतिबंधों को "अत्यधिक अस्पष्ट" बताया है (A/HRC/38/35, पैरा. 26; यह भी देखें: सामान्य कमेंट संख्या 34, पैरा. 46). बोर्ड को सबमिट की गई एक सार्वजनिक कमेंट में (PC-10055), मानवाधिकार और आतंकवाद विरोध पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष रैपर्टर ने कहा कि भले ही Facebook ने इस क्षेत्र में अपने नियमों को स्पष्ट करने के लिए कुछ प्रगति की है, लेकिन "दिशानिर्देश और मानक [अब भी] अंतरराष्ट्रीय कानून के पूरी तरह अनुरूप नहीं हैं और कुछ मौलिक अधिकारों को कमज़ोर करने का काम कर सकते हैं, जिसमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संबंध, सार्वजनिक मामलों में भागीदारी और गैर-भेदभाव शामिल हैं, लेकिन इन्हीं तक सीमित नहीं हैं." कई सार्वजनिक टिप्पणियों में ऐसी ही राय दी गईं.

बोर्ड ने नोट किया कि Facebook रिव्युअर्स को कंपनी की सार्वजनिक रूप से नज़र वाली कंपनी पॉलिसी की व्याख्या करने के लिए व्यापक आंतरिक और गोपनीय दिशानिर्देश देता है, ताकि संगत और गैर-मनमाना मॉडरेशन सुनिश्चित हो सके. हालाँकि, यह अस्वीकार्य है कि Facebook की समर्थन की परिभाषा में शामिल नहीं की गईं चीज़ों पर बने प्रमुख नियम सार्वजनिक रूप से नज़र आने वाले कम्युनिटी स्टैंडर्ड में दिखाई नहीं देते हैं.

b. वैधानिक लक्ष्य

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से संबंधित प्रतिबंध का उद्देश्य वैधानिक लक्ष्य प्राप्त करना ही होना चाहिए. ICCPR अनुच्छेद 19, पैरा. 3 में वैधानिक लक्ष्य अंकित करता है, जिसमें अन्य लोगों के अधिकारों की सुरक्षा शामिल है. बोर्ड ने नोट किया कि Facebook ने उस फ़ैसले को बदल दिया है जिसके विरुद्ध यूज़र ने अपील की थी और ऐसा बोर्ड द्वारा उस अपील को चुनने के बाद हुआ, कंपनी ने कंटेंट हटाने के एक्शन को एक वैध लक्ष्य पूरा करने के लिए उचित ठहराने की कोशिश नहीं की, बल्कि उसे हटाने के एक्शन को एक गलती के रूप में दिखाया.

कम्युनिटी स्टैंडर्ड में बताया गया है कि खतरनाक लोग और संगठन से जुड़ी पॉलिसी असलियत में लोगों को होने वाले नुकसान को रोकने और कम करने के लिए बनाई गई है. Facebook ने बोर्ड को पहले सूचित किया है कि पॉलिसी "दूसरों के अधिकारों" को सुरक्षित रखने के लिए अभिव्यक्ति को सीमित करती है, जिसे बोर्ड ने स्वीकार कर लिया है ( केस 2020-005-FB-UA).

c. आवश्यकता और आनुपातिकता

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से संबंधित प्रतिबंध वैधानिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए आवश्यक और आनुपातिक होने चाहिए. इसके लिए अभिव्यक्ति और स्पष्ट रूप से पहचाने गए खतरे के बीच सीधा संबंध होना आवश्यक है (सामान्य कमेंट 34, पैरा. 35) और प्रतिबंधों “से उन लोगों के अधिकारों में कम से कम हस्तक्षेप होना चाहिए, जिन्हें उन प्रतिबंधों से होने वाला सुरक्षात्मक लाभ मिल सकता है; जिन हितों की सुरक्षा की जानी है, उसके अनुसार ही प्रतिबंध होने चाहिए” (सामान्य कमेंट 34, पैरा. 34).

जैसा कि Facebook ने बोर्ड द्वारा इस केस के चयन के बाद अपने फ़ैसले को बदल कर स्पष्ट रूप से स्वीकार किया था, इस कंटेंट को हटाना आवश्यक या संगत नहीं था. बोर्ड के विचार में, कम्युनिटी स्टैंडर्ड में "समर्थन" शब्द की व्यापकता को इसमें शामिल नहीं की जाने वाली चीज़ों से संबंधित आंतरिक दिशानिर्देशों के गायब होने के साथ जोड़ा गया, जिसका अर्थ है कि कंटेंट हटाने का एक्शन अनावश्यक और असंगत रूप से लिया गया था. इस केस में शामिल कंटेंट में ओजलान के लंबे समय से जारी एकान्त कारावास को खत्म करने के बारे में चर्चा करने की अपील की गई थी. इसमें एक व्यक्ति के तौर पर ओजलान के बारे में बात हुई थी और उसके या PKK द्वारा किए गए हिंसक कृत्यों के लिए किसी भी समर्थन का संकेत नहीं दिया गया था. हिंसा भड़काने का कोई स्पष्ट इरादा नहीं था या इस बात की संभावना नहीं थी कि इस बयान या इसके जैसे अन्य बयानों को प्लेटफ़ॉर्म पर रहने देने से नुकसान होगा.

बोर्ड विशेष रूप से उन देशों में सार्वजनिक हित के मामलों से संबंधित कंटेंट को Facebook द्वारा हटाए जाने के बारे में चिंतित है, जहाँ मानवाधिकारों के लिए राष्ट्रीय कानूनी और संस्थागत सुरक्षा विशेष रूप से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कमज़ोर है (केस 2021-005-FB-UA और 2021-004-FB-UA). बोर्ड ने मानवाधिकारों और आतंकवाद विरोध पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष रैपर्टर द्वारा अपने सबमिशन में व्यक्त की गई चिंता को शेयर किया कि "प्लेटफ़ॉर्म पर मानवाधिकारों की कम से कम उपयुक्त सुरक्षा [...] कुछ अधिकारों की वैश्विक सुरक्षा, नागरिक स्थान के संकुचित होने और कई राष्ट्रीय परिस्थितियों में शासन, जवाबदेही और कानून के नियम से संबंधित रुझानों के नकारात्मक समेकन के संदर्भ में अत्यधिक महत्वपूर्ण हो सकती है.” बोर्ड ने नोट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष रैपर्टर ने इस संबंध में तुर्की पर विशेष चिंता व्यक्त की है ( A/HRC/41/35/ADD.2).

II.समाधान का अधिकार (अनुच्छेद 2 ICCPR)

समाधान का अधिकार अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का एक प्रमुख घटक है ( सामान्य टिप्पणी संख्या 31) तथा बिज़नेस और मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के मार्गदर्शक सिद्धांतों का तीसरा स्तंभ है. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष रैपर्टर ने कहा है कि समाधान की प्रक्रिया में "प्लेटफ़ॉर्म से जुड़े फ़ैसलों पर अपील करने के लिए एक पारदर्शी और सुलभ प्रक्रिया शामिल होनी चाहिए, जिसमें कंपनियाँ एक तर्कसंगत जवाब देंगी, जिसे सार्वजनिक रूप से भी उपलब्ध होना चाहिए" (A/74/486, पैरा 53).

इस केस में, यूज़र को सूचित किया गया था कि COVID-19 के कारण अपील करने का विकल्प उपलब्ध नहीं है. हालाँकि इसके बाद अपील की गई. बोर्ड ने केस 2020-004-IG-UA और 2021-003-FB-UA में दिए गए सुझावों के अनुरूप अपील की प्रक्रिया को बहाल करने की Facebook की ज़रूरत पर एक बार फिर ज़ोर दिया.

इस केस में यूज़र के कंटेंट को बहाल कर दिया गया था, लेकिन बोर्ड इस बात से चिंतित है कि Facebook की ओर से आंतरिक दिशानिर्देश के गायब रहने के कारण हटाने के ऐसे कितने एक्शन हो सकते हैं, जो नहीं होने चाहिए थे, जिससे खतरनाक घोषित व्यक्तियों के कारावास की शर्तों पर चर्चा करने की स्थिति पैदा हुई. Facebook ने बोर्ड को सूचित किया कि वह इस बात का रिव्यू कर रहा है कि वह इस दिशानिर्देश को अपने नए रिव्यू सिस्टम में ट्रांसफ़र करने में कैसे विफल रहा, साथ ही क्या कोई अन्य पॉलिसी भी गायब हो गई थी. हालाँकि, बोर्ड के एक सवाल के जवाब में, कंपनी ने कहा कि "यह निर्धारित करना तकनीकी तौर पर संभव नहीं है कि रिव्यूअर्स के लिए पॉलिसी से जुड़ा यह दिशानिर्देश उपलब्ध नहीं होने पर कितना कंटेंट हटा दिया गया था."

बोर्ड इस बात से चिंतित है कि Facebook की पारदर्शिता रिपोर्टिंग सार्थक रूप से यह आंकलन करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि क्या इस केस में सामने आई गलती किसी व्यापक समस्या को दर्शाती है. Facebook को सबमिट किए गए सवालों में, बोर्ड ने खतरनाक लोगों और संगठनों के "गुणगान" और "समर्थन" से संबंधित उसके नियमों को लागू करने की उसकी गलती की दरों के बारे में और जानकारी माँगी. Facebook ने बताया कि उसने खतरनाक लोगों और संगठनों से जुड़ी पॉलिसी के तहत व्यक्तिगत नियमों के स्तर पर, या केवल अपने आंतरिक दिशानिर्देशों में शामिल विशिष्ट अपवादों को लागू करने के संबंध में गलती की दरें एकत्रित नहीं कीं. Facebook ने खतरनाक लोगों और संगठनों से जुड़ी अपनी पॉलिसी का उल्लंघन करने के कारण गलत तरीके से हटाए जाने के बाद बहाल किए गए कंटेंट की मात्रा के बारे में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर बोर्ड का ध्यान दिलाया. बोर्ड ने नोट किया है कि इससे उस तरह का विवरण नहीं मिलता है, जो प्रवर्तन की सटीकता का आंकलन करने के लिए आंतरिक ऑडिट और क्वालिटी कंट्रोल में प्रदर्शित होगा. Facebook ने स्वीकार किया कि वह मॉडरेटर और ऑटोमेशन द्वारा प्रवर्तन के फ़ैसलों के लिए आंतरिक रूप से गलती दरों का विश्लेषण करता है, लेकिन उसने इस आधार पर बोर्ड को यह जानकारी देने से इनकार कर दिया कि "चार्टर के उद्देश्य के अनुसार फ़ैसला लेने के लिए यह जानकारी उचित रूप से आवश्यक नहीं है."

इसके अलावा, बोर्ड ने Facebook से पूछा कि अगर किसी सरकार द्वारा कंटेंट को फ़्लैग करने के बाद कम्युनिटी स्टैंडर्ड का उल्लंघन करने के कारण उसे हटा दिया गया है, तो क्या बोर्ड के समक्ष उसकी अपील की जा सकती है. Facebook ने कन्फ़र्म किया है कि ऐसे मामलों की अपील बोर्ड के समक्ष की जा सकती है. यह स्थानीय कानून का पालन करने के लिए हटाने का अनुरोध करने वाली सरकार के आधार पर हटाए गए कंटेंट से अलग है, जिन्हें उपनियमों के अनुच्छेद 2, धारा 1.2 के अनुसार रिव्यू से बाहर रखा गया है. बोर्ड के पास यह मानने का कोई कारण नहीं है कि यह कंटेंट सरकार द्वारा निर्दिष्ट करने का विषय था, लेकिन वह चिंतित है कि न तो उन यूज़र्स, जिनका कंटेंट कम्युनिटी स्टैंडर्ड के आधार पर हटाया गया है, और न ही बोर्ड को उस स्थिति में सूचित किया जाता है, जिसमें कंटेंट को हटाने के पीछे सरकार का हस्तक्षेप था. यह प्रवर्तन से जुड़े उन फ़ैसलों के लिए ख़ास तौर पर प्रासंगिक हो सकता है, जो बाद में गलतियों के रूप में सामने आते हैं, साथ ही जहाँ यूज़र्स को सरकार का हस्तक्षेप होने का संदेह होता है, लेकिन ऐसा होता नहीं है. Facebook की पारदर्शिता रिपोर्टिंग भी इस संबंध में सीमित ही है. इसमें स्थानीय कानून के आधार पर कंटेंट को हटाने के लिए सरकारी कानूनी अनुरोधों के आँकड़े शामिल हैं, लेकिन इसमें उस कंटेंट के बारे में डेटा शामिल नहीं है, जिसे सरकार द्वारा कंटेंट को फ़्लैग करने के बाद कम्युनिटी स्टैंडर्ड का उल्लंघन करने के कारण हटा दिया जाता है.

इन समस्याओं से पता चलता है कि कंपनी ने मानवाधिकार से जुड़ी अपनी कॉर्पोरेट पॉलिसी (सेक्शन 3) की अवहेलना तो की ही थी, वहीं समाधान के अधिकार का ध्यान भी नहीं रख सकी.

9. ओवरसाइट बोर्ड का फ़ैसला

ओवरसाइट बोर्ड ने Facebook के कंटेंट को हटाने के मूल फ़ैसले को बदलते हुए उस पोस्ट को रीस्टोर करने के लिए कहा है. बोर्ड ने यह पाया कि Facebook ने माना है कि उनका मूल फ़ैसला गलत था और उन्होंने पहले ही उस कंटेंट को रीस्टोर कर दिया है.

10. पॉलिसी से जुड़ी सलाह का कथन

जैसा कि ऊपर बताया गया है कि Facebook ने खतरनाक लोगों और संगठनों से जुड़े अपने कम्युनिटी स्टैंडर्ड को अमल में लाने के तरीके के बारे में बोर्ड से दिशानिर्देश माँगने के बाद इस कम्युनिटी स्टैंडर्ड में बदलाव कर दिया है. Facebook के अपडेट में इन सुझावों का ध्यान रखा गया है.

भूलवश गायब हुए आंतरिक दिशानिर्देश

खतरनाक लोगों और संगठनों से जुड़ी सार्वजनिक पॉलिसी में लंबित और भी बदलावों के मामले में बोर्ड ने सुझाव दिया है कि Facebook को मौजूदा पॉलिसी के प्रवर्तन की गलतियों को कम करने के लिए इन अंतरिम उपायों को अपनाना चाहिए:

1. भूलवश गायब हुए 2017 के उस दिशानिर्देश को अमल में लाने योग्य आंतरिक मानकों और उससे जुड़े ज्ञात सवालों में तुरंत फिर से शामिल करें (कंटेंट मॉडरेटर के लिए आंतरिक दिशा निर्देश), सभी कंटेंट मॉडरेटर को बताएँ कि यह दिशानिर्देश मौजूद है और जल्द ही इसके बारे में प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जा रही है.

2. खतरनाक लोगों और संगठनों से जुड़ी पॉलिसी को अमल में लाने वाली ऑटोमेटेड मॉडरेशन प्रक्रिया का मूल्यांकन करें और जहाँ आवश्यक हो, वहाँ 2017 के दिशानिर्देश को अमल में लाने में विफल होने के कारण होने वाले प्रवर्तन से जुड़ी पिछली गलतियों से ट्रेनिंग डेटा को अलग करने के लिए क्लासिफ़ायर को अपडेट करें. नया ट्रेनिंग डेटा शामिल किया जाना चाहिए, जिससे इस दिशानिर्देश को शामिल किए जाने की बात पता चले.

3. कहीं कोई अन्य पॉलिसी तो गायब नहीं हुई, यह पता लगाने के लिए जारी रिव्यू प्रक्रिया के परिणाम प्रकाशित करें, जिसमें सभी गायब पॉलिसी के विवरण के साथ वे पॉलिसी किस अवधि में गायब रहीं और उन्हें फिर से शामिल करने के लिए जो कदम उठाए गए, उनका विवरण शामिल हो.

ख़तरनाक लोगों और संगठनों से जुड़ी हमारी पॉलिसी के अपडेट

Facebook ने बोर्ड को बताया कि वह फ़िलहाल अपनी पॉलिसी से जुड़े एक अपडेट को लेकर काम कर रहा है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि “गुणगान” और “समर्थन” पर आधारित उनके नियम खतरनाक ठहराए गए किसी व्यक्ति के एकांत कारावास के हालातों या उनके मानवाधिकारों से जुड़े अन्य उल्लंघनों की चर्चा पर रोक नहीं लगाते हैं.

पॉलिसी में सुधार की इस प्रक्रिया में शुरुआती योगदान के तौर पर बोर्ड ने Facebook को ये काम करने का सुझाव दिया:

4. खतरनाक लोगों और संगठनों से जुड़ी “पॉलिसी बनाने के कारण” से पता चलना चाहिए कि मानवाधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, ख़ास तौर से मानवाधिकार उल्लंघनों और आतंकवाद से जुड़े दुरुपयोगों और आतंकवाद का मुकाबला करने की कोशिशों के बारे में खुली चर्चा के मामले में, का ध्यान रखे जाने से “सुरक्षा” का मूल्य बढ़ सकता है और इस तरह की चर्चाओं को मंच उपलब्ध करवाना इस प्लेटफ़ॉर्म के लिए बेहद ज़रूरी है. हालाँकि कभी-कभी “सुरक्षा” और “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” के बीच खींचतान की स्थिति बन जाती है, पॉलिसी बनाने के कारण में “असलियत में होने वाले उन नुकसानों” को पूरी जानकारी देकर स्पष्ट रूप से समझाना चाहिए, जिनसे बचाने की कोशिश यह पॉलिसी करती है और जब किसी की “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” छीनी जाती है, तो यह उस कोशिश को नाकाम करती है.

5. खतरनाक लोगों और संगठनों से जुड़ी पॉलिसी में ऐसे स्पष्टीकरण शामिल करें, जो यह समझाएँ कि किस तरह के “समर्थन” पॉलिसी के अंतर्गत नहीं आते हैं. यूज़र्स को खतरनाक ठहराए गए संगठनों के सदस्यों के मानवाधिकारों के कथित उल्लंघनों और हनन पर चर्चा करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए. इसे हिरासत में लिए गए व्यक्तियों तक ही सीमित नहीं होना चाहिए. इसमें संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार सम्मेलनों द्वारा संरक्षित अधिकारों की चर्चा शामिल होनी चाहिए, जैसा कि Facebook की मानवाधिकारों से जुड़ी कॉर्पोरेट पॉलिसी में बताया गया है. जैसे कि इसके तहत यातना या क्रूरता, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार या दंड, निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार के उल्लंघन, साथ ही साथ न्यायेतर, अविलंबित, या मनमाने ढंग से निष्पादन, जबरन गायब करने, असाधारण प्रस्तुति और नागरिकता रद्द करके किसी व्यक्ति को राज्यविहीन करने के आरोपों पर चर्चा की परमिशन होनी चाहिए. मानवाधिकारों के उल्लंघन और हनन के लिए जवाबदेही तय करने की अपीलों को भी संरक्षण मिलना चाहिए. ऐसा कंटेंट, जो हिंसक काम करने के लिए लोगों को उकसाता हो या उन कामों में शामिल होने के लिए नए लोगों को जोड़ता हो या अन्य तरीके से Facebook द्वारा खतरनाक ठहराए गए संगठनों तक किसी सामग्री से जुड़ी मदद पहुँचाता हो, उसे संरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए, भले ही उस कंटेंट में मानवाधिकारों से जुड़ी समस्याओं पर भी बात की गई हो. यूज़र का इरादा, वह व्यापक संदर्भ जिसके तहत वे पोस्ट करते हैं और अन्य यूज़र उनकी पोस्ट को किस तरह से लेते हैं, ये बातें इस बात का निर्धारण करने में बेहद ज़रूरी होती हैं कि उन पोस्ट के कारण असलियत में होने वाले नुकसान होने की आशंका कितनी हो सकती है.

6. कम्युनिटी स्टैंडर्ड में समझाए कि यूज़र्स, Facebook को अपनी पोस्ट से जुड़ा इरादा स्पष्ट कैसे कर सकते हैं. कंपनी द्वारा खतरनाक ठहराए गए व्यक्तियों और संगठनों की सूची सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करने के बोर्ड के मौजूदा सुझाव पर अमल करने से इसमें मदद मिलेगी (देखें: केस 2020-005-FB-UA). Facebook पर किस तरह का कंटेंट पोस्ट किया जा सकता है और किस तरह का कंटेंट पोस्ट नहीं किया जा सकता है, इसके बीच के अंतर को साफ़ तौर से समझाने वाले उदाहरण भी उन्हें देने चाहिए, जिसमें उस नियम के लागू होने के संबंध में जानकारी हो, जो यह स्पष्ट करता हो कि किस तरह का “समर्थन” इस पॉलिसी के अंतर्गत नहीं आता है.

7. Facebook के प्रोडक्ट पॉलिसी फ़ोरम के ज़रिए पॉलिसी में प्रस्तावित बदलावों में स्टेकहोल्डर की सार्थक सहभागिता सुनिश्चित करें, जिसमें लोगों का नज़रिया जानने की अपील सार्वजनिक रूप से करें. Facebook को यह एंगेजमेंट सभी क्षेत्रों की कई भाषाओं में करवाना चाहिए, साथ ही उन लोगों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए, जो उन नुकसानों से सबसे ज़्यादा प्रभावित हों, जिससे उन्हें यह पॉलिसी बचाने की कोशिश करती है. इसमें ऐसे मानवाधिकार, नागरिक समाज और शैक्षणिक संगठनों का भी एंगेजमेंट होना चाहिए, जिन्हें उन नुकसानों के बारे विशेष जानकारी होने के साथ-साथ उन नुकसानों की भी जानकारी हो, जो मौजूदा पॉलिसी के कारण ज़्यादा से ज़्यादा हो सकते हैं.

8. किसी भी नई पॉलिसी के बारे में कंटेंट मॉडरेटर को आंतरिक दिशानिर्देश और प्रशिक्षण देना सुनिश्चित करें. कंटेंट मॉडरेटर के लिए नई पॉलिसी समझना आसान बनाने के लिए उन्हें पर्याप्त रिसोर्स उपलब्ध करवाए जाने चाहिए, साथ ही उस पॉलिसी को लागू करते समय फ़ैसला लेने के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए.

सही प्रोसेस

जिन यूज़र्स का कंटेंट हटाया गया है, उनके लिए सही प्रोसेस को आगे बढ़ाने के लिए Facebook को ये काम करना चाहिए:

9. सुनिश्चित करे कि यूज़र्स को उनका कंटेंट हटाए जाने पर उसकी जानकारी दी जाए. नोटिफ़िकेशन में यह बताया जाना चाहिए कि उस कंटेंट को किसी सरकारी अनुरोध के चलते या फिर किसी कम्युनिटी स्टैंडर्ड का उल्लंघन करने पर हटाया गया है अथवा किसी राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होने के सरकारी दावे के चलते हटाया गया है (साथ ही किसी कंटेंट को हटाने का अधिकार-क्षेत्र भी बताया जाना चाहिए).

10. केस 2020-004-IG-UA के सुझाव पर अमल करते हुए Instagram के यूज़र्स को स्पष्ट करें कि Facebook के कम्युनिटी स्टैंडर्ड Instagram पर भी उसी तरह लागू होते हैं, जिस तरह Facebook पर लागू होते हैं.

पारदर्शिता रिपोर्टिंग

संशोधित पॉलिसी कितने प्रभावी तरीके से लागू की जा रही है, इस बारे में जनता की समझ बढ़ाने के लिए Facebook को ये काम करना चाहिए:

11. कम्युनिटी स्टैंडर्ड से जुड़े उल्लंघनों (राष्ट्रीय कानून के उल्लंघनों से तुलना करते हुए) के आधार पर कंटेंट हटाने के लिए सरकारों की ओर से Facebook को मिले अनुरोधों की संख्या के बारे में जानकारी शामिल करें, जिसमें उन अनुरोधों के परिणाम की जानकारी हो.

12. खतरनाक लोगों और संगठनों का “गुणगान” और “समर्थन” करने पर नियमों के तहत एक्शन लेने से जुड़ी गलती की दर के बारे में पूरी-पूरी जानकारी शामिल करें, जो क्षेत्र और भाषा के अनुसार बँटी हुई हो.

*प्रक्रिया संबंधी नोट:

ओवरसाइट बोर्ड के फ़ैसले पाँच सदस्यों के पैनल द्वारा लिए जाते हैं और उन पर बोर्ड के अधिकांश सदस्यों की सहमति होती है. ज़रूरी नहीं है कि ये फ़ैसले हर एक सदस्य की निजी राय को दर्शाएँ.

इस केस के फ़ैसले के लिए, बोर्ड की ओर से स्वतंत्र शोध को अधिकृत किया गया था. एक स्वतंत्र शोध संस्थान जिसका मुख्यालय गोथेनबर्ग यूनिवर्सिटी में है और छह महाद्वीपों के 50 से भी ज़्यादा समाजशास्त्रियों की टीम के साथ ही दुनिया भर के देशों के 3,200 से भी ज़्यादा विशेषज्ञों ने सामाजिक-राजनैतिक और सांस्कृतिक संदर्भ में विशेषज्ञता मुहैया कराई है.

मामले के निर्णयों और नीति सलाहकार राय पर लौटें